
Rama Devi Sahu
130 days ago
श्रीराम और महर्षि दुर्वासा की परीक्षा: महर्षि का आगमन और कठिन शर्त एक बार अत्यंत क्रोधी स्वभाव के महर्षि दुर्वासा भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने अपने ६०,००० शिष्यों के साथ अयोध्या पहुँचे। उन्होंने श्रीराम के सामने भोजन की एक अत्यंत कठिन शर्त रखी। महर्षि ने कहा कि वे ऐसा भोजन करेंगे जो जल, अग्नि या धेनु (गाय के दूध) की सहायता के बिना बना हो। साथ ही, उन्होंने शिव पूजा के लिए ऐसे दुर्लभ पुष्पों की मांग की जो मृत्युलोक में किसी ने न देखे हों, और इस सब के लिए केवल एक प्रहर का समय दिया। श्रीराम का पुरुषार्थ और इंद्र की सहायता मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने विचलित हुए बिना इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने लक्ष्मण जी के माध्यम से देवराज इंद्र को एक पत्र भेजा। पत्र मिलते ही इंद्रदेव स्वयं कल्पवृक्ष और पारिजात वृक्ष लेकर अयोध्या पहुँचे। दिव्य पूजन और भोजन महर्षि दुर्वासा ने पारिजात के अद्भुत पुष्पों से भगवान शिव की आराधना की। इसके पश्चात, माता सीता ने कल्पवृक्ष से प्रार्थना की, जिससे क्षण भर में बिना अग्नि, जल या दूध के बने दिव्य व्यंजन प्रकट हो गए। निष्कर्ष भगवान श्रीराम की विनम्रता और सामर्थ्य को देखकर महर्षि दुर्वासा अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने श्रीराम की भूरि-भूरि प्रशंसा की और सन्तुष्ट होकर आशीर्वाद देते हुए प्रस्थान किया। यह कथा सिद्ध करती है कि ईश्वर अपने भक्तों के शील और अतिथि सत्कार के लिए सृष्टि की असंभव शक्तियों को भी सुलभ कर देते हैं।

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