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Rama Devi Sahu

334 days ago

माँ महागौरी - पवित्रता और तपस्या का फल कथा महागौरी की कथा सीधे कालरात्रि के स्वरूप के बाद आती है। भयंकर युद्धों के बाद देवी की त्वचा का रंग काला पड़ गया था । भगवान शिव ने विनोद में उन्हें 'काली' कहकर संबोधित किया। इससे व्यथित होकर, पार्वती ने अपना गौर वर्ण पुनः प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की । उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर, उन्हें हिमालय की मानसरोवर झील (या गंगा) में स्नान करने की सलाह दी गई । जैसे ही उन्होंने स्नान किया, उनकी श्याम त्वचा उनसे अलग होकर एक अन्य देवी, कौशिकी के रूप में प्रकट हुई, और पार्वती शंख, चंद्रमा और चमेली के समान अत्यंत गौर वर्ण ('महा गौरी') के साथ प्रकट हुईं। वे पवित्रता, शांति और तपस्या के सफल परिणाम का प्रतीक हैं। स्वरूप और प्रतीक उनका वर्ण अत्यंत गौर है और वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं । वे एक सफेद वृषभ पर सवार होती हैं, जो उन्हें पुनः शिव से जोड़ता है और पवित्रता तथा धर्म का प्रतीक है । उनकी चार भुजाएँ हैं। वे त्रिशूल और डमरू धारण करती हैं, जो शिव के प्रतीक हैं, और उनके अन्य दो हाथ वरद और अभय मुद्रा में हैं । उनकी पूरी छवि—सफेद रंग, सफेद बैल, सफेद वस्त्र—युद्ध की उथल-पुथल के बाद प्राप्त पूर्ण शुद्धि और शांति का एक शक्तिशाली प्रतीक है। महागौरी की काली त्वचा से कौशिकी का जन्म एक आकर्षक पौराणिक घटना है। यह देवी के विभिन्न पहलुओं के पृथक्करण का प्रतीक है। उनकी उग्र, राक्षस-संहारिणी शक्ति (युद्ध से संचित काली त्वचा) एक अलग इकाई (कौशिकी) में बाह्य हो जाती है, जिससे उनका मूल स्वरूप (पार्वती) अपनी शुद्ध, शांत ऊर्जा (महागौरी) में लौट आता है। यह दर्शाता है कि यद्यपि उग्रता बुराई से लड़ने के लिए एक आवश्यक गुण है, यह उनका मौलिक स्वभाव नहीं है। उनका सच्चा स्वरूप शांति और पवित्रता है, जो प्राप्त की जाने वाली अंतिम अवस्था है। उपासना विधि और मंत्र यह दिन महाअष्टमी के रूप में मनाया जाता है, जो नवरात्रि का एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन अक्सर कन्या पूजन किया जाता है । बीज मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः । स्तुति: या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: । प्रार्थना: श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा । भोग, पुष्प और रंग भोग: नारियल या नारियल से बनी मिठाइयाँ उनका मुख्य भोग हैं । कन्या पूजन के लिए हलवा, पूरी और काले चने भी चढ़ाए जाते हैं । पुष्प: मोगरा, बेला और चमेली जैसे सफेद फूल उन्हें प्रिय हैं । रंग: आठवें दिन का रंग पीकॉक ग्रीन या गुलाबी है, जो आशावाद, पवित्रता और करुणा का प्रतीक है।

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Comments (6)

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 30, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 30, 2025

🌷🌷 जय माता दी मातामहागौरी।। मयंबे जगदंबे मां दुर्गा माता का आठवां स्वरूप माता गौरी मां की कृपा दृष्टि सदैव आप और आपके पूरे परिवार पर बनी रहे ््््््ॐ 🌷🚩 आपका हर एक पल खुशियों से भरा हो//🔹 जय माता दी भाजी धन्यवाद जी बहुत ही अच्छीपोस्ट//एवं ((लाइन कोट्स स्टोरी)) बेहतरीन पोस्ट के लिए बहुत-बहुत धन्यवादजी//🔹🙏🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 30, 2025

🙏🌺 Jai Mata Di 🌺🙏 Suprabhat Jii 🙏 Maa Mahagauri ki Aasirbad se Aap ka Har Pal Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 30, 2025

🙏🌺 Jai Mata Di 🌺🙏 Suprabhat Jii 🙏 Maa Mahagauri ki Aasirbad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🙏 Aap ka Din Subha Mangalmay Ho 🙏🌹🌹

Runa Sinha

Runa Sinha

Sep 30, 2025

🌺🙏🌺 जय मां महागौरी 🌺🙏🌺 सुप्रभात वंदन बहना जी 🌺🙏🌺 आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो 🌺🙏🌺