MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

67 days ago

. राधानाम की वंशी एक बार प्यारी लाडली श्रीराधा रानी ने प्यारे श्यामसुन्दर से बोली–प्यारे ! आज हमारे मन में आपकी मुरली बजाने की इच्छा हो रही है। श्यामसुन्दर बोले–प्यारीजू ! यह मुरली आपसे नहीं बजेगी। श्रीराधा रानी–क्यों ? क्या मुझे बजाना नहीं आता ? श्यामसुन्दर–नहीं नहीं प्यारीजू ! आप तो चौंसठ गुणों से परिपूर्ण हैं, पर यह मुरली आपसे नहीं बजेगी। राधा रानी श्यामसुन्दर से मुरली लेकर बजाने लगीं, उसमें हवा भरीं। पर वह नहीं बज रही थी, तो राधा रानी बोली–प्यारे ! अवश्य तुम कोई जादूगरी कर रहे हो, इतने में ललिता सखी आ गई। ललिताजू ने कहा–हे स्वामिनी जू ! यह मुरली आपसे नहीं बजेगी। श्रीराधा रानी बोली–ललिते ! तू भी श्याम सुन्दर से मिली हुई है ? ललिताजू बोलीं–प्यारीजू ! आप इस मुरली में क्या नाम भर रही हैं ? श्रीराधा बोली–कृष्ण नाम। ललिताजू–तभी तो। प्यारीजू यह मुरली कृष्ण नाम से नहीं बजेगी, यह केवल आपके नाम की अनन्य है। श्यामसुन्दर इस पर आपके नाम का ही गुणगान करते हैं, आप राधे नाम बजाइए तब बजेगी। तब श्रीराधा जी मुरली में राधे नाम बजाई तब मुरली बजने लगी। प्यारी श्रीराधा रानी प्यारे श्यामसुन्दर के अनन्य प्रेम से प्रसन्न होकर उन्हें कण्ठ से लगा लिया। ० ० ० ॥जय जय श्री राधे॥ ********************************************

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!