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Rama Devi Sahu

358 days ago

🙏‼️ Om Shree Paramatmane Namah ‼️🙏 🌹🌹 Pitru Paksha 🌹 🌹 🙏🌹 Aap Sabhi ko Bhadra Purnima ki Hardik Shubhkamnaye 🙏🌹 Dt.07.09.2025 (Sunday) ************************* श्राद्ध का महत्व और उद्देश्य श्राद्ध का अर्थ है 'सच्ची श्रद्धा से किया गया कर्म'। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हम अपने पूर्वजों, जैसे माता-पिता, दादा-दादी, या अन्य दिवंगत परिजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। इसके पीछे कुछ मुख्य कारण और उद्देश्य हैं: * पूर्वजों को शांति और मुक्ति देना: माना जाता है कि श्राद्ध करने से पितरों (पूर्वजों) की आत्मा को शांति मिलती है। जब तक कोई व्यक्ति श्राद्ध नहीं करता, तब तक उसके पूर्वज धरती और स्वर्ग के बीच भटकते रहते हैं। श्राद्ध के माध्यम से वे मुक्ति प्राप्त करते हैं। * कर्तव्य का पालन: हिन्दू धर्म में, पितृ ऋण (पूर्वजों का कर्ज) को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह एक तरह से अपने पितरों द्वारा दिए गए जीवन और संस्कारों के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है। श्राद्ध करके व्यक्ति इस ऋण से मुक्त होता है। * पारिवारिक बंधन: श्राद्ध पक्ष परिवार के सदस्यों को एक साथ लाता है, जिससे वे अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेते हैं। यह परंपरा हमें अपनी जड़ों और पारिवारिक मूल्यों से जोड़े रखती है। * पितृ दोष से मुक्ति: ज्योतिष और धर्म शास्त्रों में माना जाता है कि यदि पितरों को शांति न मिले तो व्यक्ति को पितृ दोष लगता है, जिससे जीवन में कई तरह की समस्याएं आती हैं। श्राद्ध करने से इस दोष से मुक्ति मिलती है। श्राद्ध पक्ष की कहानी श्राद्ध पक्ष की शुरुआत महाभारत काल से जुड़ी हुई है। इसकी सबसे प्रचलित कहानी दानवीर कर्ण से संबंधित है। जब महादानि कर्ण की मृत्यु हुई, तो उनकी आत्मा स्वर्ग लोक पहुंची। वहां उन्हें भोजन के रूप में सोना, चांदी और गहने दिए गए, क्योंकि उन्होंने जीवन भर इन चीजों का दान किया था। जब कर्ण ने देवताओं से पूछा कि उन्हें भोजन क्यों नहीं दिया जा रहा, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी अपने पूर्वजों को अन्न का दान नहीं किया था। कर्ण ने देवताओं से अपनी गलती सुधारने के लिए प्रार्थना की। तब उन्हें 16 दिन के लिए धरती पर वापस भेजा गया, ताकि वे अपने पूर्वजों को अन्न और जल का दान कर सकें। इन 16 दिनों में कर्ण ने अपने पितरों का श्राद्ध किया और उन्हें भोजन, जल, और तर्पण अर्पित किए। इसके बाद उनकी आत्मा को शांति मिली और वे वापस स्वर्ग लोक चले गए। इन्हीं 16 दिनों को श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष के रूप में जाना जाने लगा। यह मान्यता है कि इन 16 दिनों के दौरान पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए श्राद्ध को स्वीकार करते हैं। आज श्राद्ध पक्ष में लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार उनका तर्पण और श्राद्ध करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान दान-पुण्य करने से पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।

Comments (6)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 7, 2025

🙏🌹❤️🌹🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 7, 2025

Aap ko Bahut Bahut Dhanyawad Jii 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 7, 2025

Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 7, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 7, 2025

🌹👌👌 वेरी नाइस स्टोरी जी बहन जी।👌👌🌹

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Sep 7, 2025

🌹🌹 गुड इवनिंग शुभ संध्या शुभ वंदन जी।। शुभ रविवार।। शाम की हार्दिक शुभकामनाएं।। राधे राधे जी जय श्री कृष्ण जी।।बहन जी।।🌹🌹