MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

284 days ago

*गुरु नानक देव जी की तीन बड़ी सीख- नाम जपो, ईमानदारी से काम करो और दान करो।* यह शिक्षाएँ कर्म से जुड़ी हुई हैं। कर्म में श्रेष्ठता लाने की ओर ले जाती हैं। 1499 ई. में जब गुरु नानक देव जी 30 साल के हो गए थे, तब उनमें अध्यात्म परिपक्व हो चुका था। आज जिसे हम पवित्र गुरुग्रंथ साहिब के नाम से जानते हैं, उसके शुरुआती 940 दोहे इन्हीं की देन हैं। *आदिग्रंथ की शुरुआत मूल मंत्र से होती है, जिसमें हमारा ‘एक ओंकार’ से साक्षात्कार होता है।* मान्यता है कि गुरु नानक देव जी अपने समय के सारे धर्मग्रंथों से भली-भांति परिचित थे। उनकी *सबसे बड़ी सीख थी- हर व्यक्ति में, हर दिशा में, हर जगह ईश्वर मौजूद है।* जीवन के प्रति उनके नजरिए और सीख इन चार किस्सों के माध्यम से आसानी से समझी जा सकती है। • गुरु नानक जी की तीन सीख: *नाम जपो* - गुरु नानक देव जी ने कहा है- ‘सोचै सोचि न होवई, जो सोची लखवार। चुपै चुपि न होवई, जे लाई रहा लिवतार।’ यानी ईश्वर का रहस्य सिर्फ सोचने से नहीं जाना जा सकता है, इसलिए नाम जपें। *नाम जपना यानी ईश्वर का नाम बार-बार सुनना और दोहराना।* नानक जी ने इसके दो तरीके बताए हैं- संगत में रहकर जप किया जाए। संगत यानी *पवित्र संतों की मंडली या एकांत में जप किया जाए। जप से चित्त एकाग्र हो जाता है और आध्यात्मिक-मानसिक शक्ति मिलती है। मनुष्य का तेज बढ़ जाता है।* एक बार मक्का पहुंचने से पहले नानक देव जी थक कर आरामगाह में रुक गए। उन्होंने मक्का की ओर चरण किए थे। यह देखकर हाजियों की सेवा में लगा जियोन नाम का शख्स नाराज हो गया और बोला-आप मक्का मदीना की तरफ चरण करके क्यों लेटे हैं? नानक जी बोले- ‘अगर तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा, तो खुद ही चरण उधर कर दो, जिधर खुदा न हो।’ नानक जी ने जियोन को समझाया- *हर दिशा में खुदा है। सच्चा साधक वही है जो अच्छे काम करता हुआ खुदा को हमेशा याद रखता है।* *किरत करो* - यानी *ईमानदारी से मेहनत कर आजीविका कमाना।* श्रम की भावना सिख अवधारणा का भी केंद्र है। इसे स्थापित करने के लिए नानक जी ने एक अमीर जमींदार के शानदार भोजन की तुलना में गरीब के कठिन श्रम के माध्यम से अर्जित मोटे भोजन को प्राथमिकता दी थी। *वंड छको* - एक बार गुरु नानक जी दो बेटों और लेहना (गुरु अंगद देव) के साथ थे। सामने एक शव ढंका हुआ था। नानक जी ने पूछा- इसे कौन खाएगा। बेटे मौन थे। लेहना ने कहा- मैं खाऊंगा। उन्हें गुरु पर विश्वास था। कपड़ा हटाने पर पवित्र भोजन मिला। लेहना ने इसे गुरु को समर्पित कर ग्रहण किया। नानक जी ने कहा- लेहना को पवित्र भोजन मिला, क्योंकि उसमें समर्पण का भाव और विश्वास की ताकत है। सिख *इसी आधार पर आय का दसवां हिस्सा साझा करते हैं, जिसे दसवंध कहते हैं। इसी से लंगर चलता है।* गुरुनानक देवजी को आजीविका के लिए दूसरों के यहां काम भी करना पड़ा। बहनोई जैराम जी के जरिए वे सुल्तानपुर लोधी के नवाब के शाही भंडार की देखरेख करने लगे। उनका एक प्रसंग प्रचलित है। एक बार वे तराजू से अनाज तौलकर ग्राहक को दे रहे थे तो गिनते-गिनते जब 11, 12, 13 पर पहुंचे तो उन्हें कुछ अनुभूति हुई। वह तौलते जाते थे और 13 के बाद *‘तेरा फिर तेरा और सब तेरा ही तेरा’ कहते गए।* इस घटना के बाद वह मानने लगे थे कि *‘जो कुछ है वह परमबह्म्र का है, मेरा क्या है?’* नानक जी अपने शिष्य मरदाना के साथ कंगनवाल पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कुछ लोग जनता को परेशान कर रहे हैं। नानक जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया- बसते रहो। दूसरे गांव पहुंचे, तो अच्छे लोग दिखे। गांव वालों को नानक जी ने आशीर्वाद दिया- उजड़ जाओ। इस पर मरदाना को आश्चर्य हुआ। उसने पूछा- जिन्होंने अपशब्द कहे, उन्हें बसने का और जिन्होंने सत्कार किया, उन्हें आपने उजड़ने का वर दिया, ऐसा क्यों? नानक जी बोले- *बुरे लोग एक जगह रहें, ताकि बुराई न फैले और अच्छे लोग फैलें ताकि अच्छाई का प्रसार हो।* वाहेगुरू || वाहेगुरू || वाहेगुरू

Post media

Comments (6)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 19, 2025

Dhanyawad 🌹 Bhagwan ki Aasirbad Aap pr Sadeib Bani Rahe 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 19, 2025

Jai Shree Shyam 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 19, 2025

Jai Shree Shyam 🙏🌹🌹

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Nov 19, 2025

Jai shree shyam 🙏🙏

Rakesh Kumar

Rakesh Kumar

Nov 19, 2025

jai shree shyam 🙏