
Rama Devi Sahu
226 days ago
क्षीरसागर में भगवान विष्णु शेषशय्या पर विश्राम कर रहे थे और माता लक्ष्मी उनके चरण दबा रही थीं। उसी समय भगवान के एक चरण का अंगूठा शय्या से बाहर आ गया और क्षीरसागर की लहरें उससे अठखेलियाँ करने लगीं। इसे देखकर क्षीरसागर में रहने वाले एक कछुए के मन में विचार आया— “यदि मैं भगवान विष्णु के अंगूठे को अपनी जिह्वा से स्पर्श कर लूँ, तो मेरा मोक्ष हो जाएगा।” वह जैसे ही भगवान की ओर बढ़ा, शेषनाग ने उसे देख लिया और ज़ोर से फुँफकार कर उसे भगा दिया। भयभीत होकर कछुआ छिप गया। कुछ समय बाद उसने फिर प्रयास किया, पर इस बार माता लक्ष्मी की दृष्टि उस पर पड़ गई और उन्होंने भी उसे लौटा दिया। इस प्रकार उस कछुए ने अनेक प्रयास किए, किंतु शेषनाग और लक्ष्मी माता के कारण वह सफल न हो सका। समय बीतता गया—सृष्टि की रचना हुई, सतयुग बीता और त्रेता युग का आगमन हुआ। इन युगों के बीच उस कछुए ने अनेक योनियों में जन्म लिया और हर जन्म में प्रभु प्राप्ति का प्रयास करता रहा। कठोर तपस्या से उसने दिव्य दृष्टि प्राप्त कर ली थी। उसे ज्ञात हो गया था कि त्रेता युग में वही विष्णु भगवान श्रीराम के रूप में, शेषनाग लक्ष्मण के रूप में और लक्ष्मी माता सीता के रूप में अवतरित होंगे तथा वनवास काल में उन्हें गंगा पार करनी पड़ेगी। इसी कारण वह केवट बनकर उसी तट पर उपस्थित हुआ। दीर्घ तपस्या से प्रभु के मर्म को जान लेने के कारण उसने श्रीराम से कहा— “कहहि तुम्हार मरमु मैं जाना।” इस बार केवट यह अवसर किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था। उसे स्मरण था कि पहले शेषनाग की फुँफकार से वह डर जाता था, पर अब लक्ष्मण के तीर से मर जाना भी उसे स्वीकार था, किंतु यह सौभाग्य खो देना नहीं। इसी भाव को तुलसीदास जी ने इन पंक्तियों में व्यक्त किया— पद कमल धोइ चढ़ाइ नाव न नाथ उरराई चहौं। मोहि राम राउरि आन दसरथ सपथ सब साची कहौं॥ बरु तीर मारहु लखनु पै जब लगि न पाय पखारिहौं। तब लगि न तुलसीदास नाथ कृपाल पारु उतारिहौं॥ अर्थात — “हे नाथ! मैं आपके चरण धोकर आपको नाव पर चढ़ाऊँगा, मुझे उतराई नहीं चाहिए। भले ही लक्ष्मण मुझे तीर मार दें, पर जब तक आपके चरण न धो लूँ, तब तक पार नहीं उतारूँगा।” केवट की निष्कपट भक्ति देखकर प्रभु श्रीराम मुस्कुराए। तुलसीदास जी लिखते हैं— सुनि केवट के बैन प्रेम लपेटे अटपटे। बिहसे करुनाऐन चितइ जानकी लखन तन॥ केवट न केवल स्वयं, बल्कि अपने परिवार और पितरों को भी मोक्ष दिला देता है— पद पखारि जलु पान करि आपु सहित परिवार। पितर पारु करि प्रभुहि पुनि मुदित गयउ लेइ पार॥ अद्भुत दृश्य जब केवट प्रभु के चरण धो रहा था, वह दृश्य अत्यंत भावमय था। वह एक-एक चरण को सात-सात बार धोता, ताकि प्रभु के पाँव धूल से भी न छुएँ। अंत में वह बोला— “प्रभु, एक चरण कठौती में और दूसरा मेरे हाथ पर रखिए।” जब प्रभु वैसा ही करने लगे तो दोनों पैरों पर खड़े न रह सके। बोले— “केवट, मैं गिर जाऊँगा।” केवट बोला— “चिंता न करें प्रभु, दोनों हाथ मेरे सिर पर रखकर खड़े हो जाइए।” जैसे माँ के स्नान कराते समय बच्चा माँ के सिर पर हाथ रखता है, वैसे ही प्रभु आज केवट पर आश्रित हो गए। तब भगवान बोले— “केवट, आज मेरा अभिमान टूट गया। आज तक मैं समझता था कि मैं भक्तों को गिरने से बचाता हूँ, पर आज जाना कि भक्त भी भगवान को गिरने से बचाता है।”

Comments (6)

Rama Devi Sahu
Jan 17, 2026
‼️🌹 Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Shubha Shanivar ki Subha Kamanayen ke Sath Subha Dopahar Jii ‼️🙏

Rama Devi Sahu
Jan 17, 2026
🙏‼️ Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram 🙏 Shubha Shanivar Subah Kamanayen ke Sath Subha Dopahar Jii ‼️🙏

Radhe Radhe
Jan 17, 2026
‼️जय बजरंगबली जय श्रीराम,शनिवार दोपहर की शुभकामनाएं‼️

H.S.CHAHAR
Jan 17, 2026
🙏🌹जय श्री राम जय बजरंगबली सुबह की राम राम जी 🙏🌹

Rama Devi Sahu
Jan 17, 2026
🙏🌹 Jai Siya Ram Ji ki 🙏 Shubha Shanivar ki Subha Kamanayen 🌹 Suprabhat Jii 🙏🌹🌹

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Jan 17, 2026
🙏श्रीमन्नारायण नारायण नारायण नारायण ।टेक। लक्ष्मीनारायण नारायण नारायण नारायण बद्रीनारायण नारायण नारायण नारायण मुक्तिनारायण नारायण नारायण नारायण सत्यनारायण नारायण नारायण नारायण गोदानारायण नारायण नारायण नारायण वेंकटनारायण नारायण नारायण नारायण
