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Rama Devi Sahu

6 hours ago

इस प्रश्न का उत्तर ,युद्ध का नहीं… भाव और संबंध की गहराई को समझने से मिलेगा। रामायण हमें यह नहीं सिखाती कि कौन अपना है और कौन पराया… बल्कि यह सिखाती है कि “किसके साथ हमारा हृदय जुड़ा है” वही वास्तव में अपना है। जब युद्ध में लाखों सैनिक गिरे, वे धर्मयुद्ध का हिस्सा थे। वे कर्तव्य निभा रहे थे… और भगवान राम उनके त्याग को जानते थे। परंतु लक्ष्मण केवल एक योद्धा नहीं थे — वे राम के प्राण, विश्वास, और आत्मा का अंश थे। 👉 इसलिए जब लक्ष्मण मूर्छित हुए, तो राम के लिए वह केवल एक सैनिक का गिरना नहीं था… वह ऐसा था मानो स्वयं का एक हिस्सा टूट गया हो। आध्यात्मिक सत्य यह है: संसार में हर संबंध समान नहीं होता। कुछ रिश्ते कर्म से बनते हैं, और कुछ आत्मा से जुड़ते हैं। लक्ष्मण का प्रेम निस्वार्थ था — ना राज्य की इच्छा, ना प्रसिद्धि की लालसा… बस एक ही उद्देश्य — “भैया राम की सेवा”। और जहां प्रेम इतना शुद्ध हो… वहाँ भगवान भी भेद कर देते हैं। ✨ इसलिए राम ने संजीवनी मंगाई — क्योंकि वह केवल लक्ष्मण को बचाना नहीं था, बल्कि उस प्रेम, उस समर्पण, उस आत्मिक बंधन को जीवित रखना था। अंत में एक गहरा संदेश: “ईश्वर के लिए सभी समान हैं, पर जो प्रेम में सच्चा होता है… वह ईश्वर के सबसे करीब होता है।” यही कारण है — राम ने ‘अपना’ और ‘पराया’ दोनों देखा, पर दिल हमेशा ‘अपनों’ के लिए ही धड़कता है… ❤️

Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 29, 2026

मंगलवार मंगलमय हो। प्रभु श्री राम और संकट मोचन हनुमान जी की कृपा सदा हम सब पर बनी रहे। हार्दिक शुभकामनाएं। जय श्री राम। 🌹🙏

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Sep 29, 2026

जय हो अंजनी पुत्र के 🌹🙏