
Rama Devi Sahu
25 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 06 अगस्त 2026* *⛅दिन - गुरुवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - अष्टमी शाम 06:52 तक तत्पश्चात् नवमी* *⛅नक्षत्र - भरणी रात्रि 08:13 तक तत्पश्चात् कृत्तिका* *⛅योग - गण्ड दोपहर 03:01 तक तत्पश्चात् वृद्धि* *⛅राहुकाल - दोपहर 02:11 से दोपहर 03:49 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:59* *⛅सूर्यास्त - 07:06 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:32 से प्रातः 05:16 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:06 से दोपहर 12:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:11 से मध्यरात्रि 12:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🕉️ ब्राह्मणकथा वर्णन 1, सर्ग 265 📜* *🔴 कदम्ब तपा बोले, हे साधो! मुझसे पूछो तो अपना वृत्तान्त मैं कहता हूँ |मैं मालव देश का राजा👑 था और चिरपर्यन्त खेद से रहित मैंने विषय भोग भोगे तब मुझको यह विचार उपजा कि यह संसार स्वप्नमात्र💭 है और इसको सत्य⚖️ जानकर स्थित् होना मूर्खता है | इतनी मेरी आयु⏳ बीती पर मैंने सुकृत कुछ न किया |* *🔴 यह विषय भोग आपातरमणीय और नाशवन्त हैं इनको मैं चिरपर्यन्त भोगता रहा हूँ और मुझको शान्ति🕊️ न प्राप्त हुई-तृष्णा🔥 बढ़ती गई- इससे वही उपाय करूँ जिससे मुझको शान्ति हो और फिर कदाचित् दुःखी😢 न होऊँ |* *🔴 हे साधो! जब यह विचार मुझको उदय🌅 हुआ तब मैंने वैराग्य करके राज्य की लक्ष्मी त्याग की और ऋषि और मुनियों के स्थान देखता इस कदम्बवृक्ष🌳 के नीचे आया | यहाँ आठ भाई ब्राह्मण थे उनमें से एक तो इसी पर्वत⛰️ पर तप करने लगा था, दूसरा स्वामिकार्त्तिक के पर्वत पर तप करने गया, तीसरा बनारस में तप करने लगा और चौथा हिमालय पर तप करने गया | चार भाई तो इस प्रकार चारों स्थानों को गये और चार भाई यहाँ तप करने लगे | उन सबकी यही कामना थी कि हम पृथ्वी🌍 के सातों द्वीपों के राजा हों |* *🔴 हे साधो! इसको तो सूर्य☀️ ने वर दिया है और बाकी जो सात थे उन्होंने वागीश्वरी भवानी के इष्ट करके तप किया जब वह प्रसन्न हुई और बोली कि वर माँगो तब उन्होंने कहा कि हम सप्तद्वीप पृथ्वी के राजा हों | निदान उन सातों ने एक ही वर माँगा और उनको वर देकर परमेश्वरी अन्तर्धान हो गई | उन्होंने यह भी वर माँगा था कि यहाँ के वासियों का स्थान भी हमारे पास हो |* *🔴 हे साधो इस वर को पाकर वे वहाँ से चले और अपने गृह🏠 गये और वागीश्वरी वहाँ बारह वर्ष पर्यन्त रहकर फिर उनकी मर्यादा थापने के निमित्त यहाँ से अन्तर्धान हो गई और यहाँ के वासी भी सब जाते रहे | बागीश्वरी के जाने से यह स्थान शून्य हो गया | एक यह कदम्ब का वृक्ष रह गया है और मैं ध्यान🧘♂️ में स्थित रहा हूँ | यह कदम्ब का वृक्ष वागीश्वरी ने अपने हाथ से लगाया था इस कारण यह नष्ट💥 नहीं हुआ जर्जरीभाव भी नहीं हुआ |* *🔴 हे साधो! और सब जीव यहाँ आकर अदृष्ट हो गये इस कारण सब शुभ आचार न रहे | उन आठों भाइयों में सात आगे गये हैं और एक यहाँ बैठा है इसको भी घर जाना है, वहाँ सब इकट्ठे होंगे | जैसे अष्टवसु ब्रह्मपुरी में एकत्र हों |* *🔴 हे साधो! जब वे गृह से तप करने के निमित्त निकले तब उनकी स्त्रियों ने विचार किया कि हमारे भर्ता तो तप करने गये हैं हम भी जाकर तप करें इसलिये उन आठों ने तप आरम्भ किया और सौ सौ चान्द्रायण व्रत किये तब उनका शरीर💪 जैसे बसन्त ऋतु की मञ्जरी जेठ आषाढ़ में कृश हो जाती है तैसे ही हो गया |* *🙏🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🙏*
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 6, 2026
🙏‼️ Hari Om Tat Sat ‼️🙏 Subha Dopahar Ji 🌹🌹

प्रेम कुमार
Aug 6, 2026
🌹🌹 ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🌹 शुभ प्रभात वंदन बहना 🌹🌹
