
Rama Devi Sahu
163 days ago
ब्रह्मा और माँ काली – सृष्टि की शक्ति की रहस्यमयी कथा प्राचीन काल की बात है। जब सृष्टि का निर्माण हो रहा था, तब भगवान ब्रह्मा अपने दिव्य कमलासन पर बैठकर संसार की रचना कर रहे थे। उन्होंने आकाश, पृथ्वी, जल, पर्वत, वनस्पति और असंख्य जीवों को जन्म दिया। सृष्टि दिन-प्रतिदिन फैलती जा रही थी। लेकिन एक दिन ब्रह्मा जी के मन में एक गहरा प्रश्न उठा। उन्होंने सोचा – “मैं सृष्टि का निर्माता हूँ, पर यह शक्ति मुझे कहाँ से मिलती है? कौन है जो इस पूरी सृष्टि के पीछे असली ऊर्जा का स्रोत है?” इस रहस्य को जानने की तीव्र इच्छा उनके मन में जागी। तब उन्होंने कठोर तपस्या करने का निश्चय किया। ब्रह्मा जी ने हजारों वर्षों तक ध्यान और साधना की। उनकी तपस्या से पूरा ब्रह्मांड गूंज उठा। तभी एक दिन आकाश में भयंकर प्रकाश प्रकट हुआ। चारों ओर अग्नि के समान तेज फैल गया। उस दिव्य प्रकाश से माँ काली प्रकट हुईं। उनका रूप अत्यंत शक्तिशाली और अद्भुत था। उनके नेत्रों में अनंत शक्ति चमक रही थी और उनके चारों ओर दिव्य ऊर्जा की लहरें उठ रही थीं। ब्रह्मा जी ने तुरंत हाथ जोड़कर माँ काली को प्रणाम किया और विनम्रता से बोले, “हे आदिशक्ति! मैं सृष्टि का निर्माण करता हूँ, लेकिन मैं जानना चाहता हूँ कि वह शक्ति कौन-सी है जो मुझे यह कार्य करने की क्षमता देती है?” माँ काली मुस्कुराईं। उनकी आवाज़ पूरे ब्रह्मांड में गूंज उठी। उन्होंने कहा, “हे ब्रह्मा! तुम सृष्टि के निर्माता हो, परंतु सृष्टि की मूल शक्ति शक्ति तत्त्व है। वही शक्ति मैं हूँ। मेरे बिना न सृष्टि बन सकती है, न उसका पालन हो सकता है और न ही उसका परिवर्तन संभव है।” यह सुनकर ब्रह्मा जी को सच्चाई का बोध हुआ। उन्हें समझ आ गया कि सृष्टि की हर ऊर्जा, हर गति और हर जीवन का मूल स्रोत माँ काली और आदिशक्ति ही हैं। उन्होंने माँ काली के चरणों में झुककर कहा, “हे जगदंबा! आज मुझे सृष्टि का सबसे बड़ा रहस्य समझ में आ गया। आपकी शक्ति के बिना मैं भी कुछ नहीं कर सकता।” माँ काली ने उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा, “जहाँ ज्ञान, विनम्रता और शक्ति का सम्मान होगा, वहीं सृष्टि संतुलित और पवित्र बनी रहेगी।” उस दिन से ब्रह्मा जी और भी अधिक श्रद्धा से आदिशक्ति का स्मरण करने लगे। सीख: इस कथा से हमें यह समझ मिलता है कि पूरे ब्रह्मांड की मूल शक्ति आदिशक्ति है, जिनसे ही सृष्टि, जीवन और ऊर्जा का जन्म होता है। 🙏

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