
प्रशांत कुमार मिश्रा
1 day ago
. श्रीराम चरण वन्दना . बंदउँ श्री रघुबीर युगल चरना । जेहि चरनन दशरथ के प्यारे , खेलत फिरत भवन अंँगना । बंदउँ श्री रघुबीर........... जेहि चरनन मिथिला पति धोए , सिया संग शोभे जनक अँगना । बंदउँ श्री रघुबीर........... जेहि चरनन बन बन में भटके , धावत देखि कनक हिरना । बंदउँ श्री रघुबीर........... जेहि चरनन मारुत सुत सेवत , निरखि निरखि के जुड़ावे नयना । बंदउँ श्री रघुबीर........... जेहि चरनन सिय हिय में धारे , निशि दिन जपत रहत बनमा । बंदउँ श्री रघुबीर...........

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