
Rama Devi Sahu
125 days ago
“जब जगन्नाथ ने थामा भक्त का हाथ” 🙏✨ ⭕‼️⭕🚩 ⚜️जब जीवन के अंधेरों ने हर राह को घेर लिया, जब दुखों ने मनुष्य का साहस भी तोड़ दिया, तब एक भक्त रोता हुआ प्रभु जगन्नाथ के द्वार आया, आँखों में आँसू, हृदय में पीड़ा, और होंठों पर बस नाम समाया। ✨वह बोला —😭😢 “हे नीलाचल के स्वामी, अब कोई सहारा नहीं, दुनिया ने ठुकरा दिया, अब आपका किनारा सही। मेरे जीवन की नैया तूफ़ानों में डोल रही है, हर साँस जैसे दुख की आग में जल रही है।” ✨प्रभु जगन्नाथ मुस्कुराए, उनकी बड़ी-बड़ी आँखों में करुणा का सागर था। उनकी शांत मुस्कान में ही हर दुख मिटाने का अद्भुत अवसर था। ✨मंदिर की घंटियाँ गूँज उठीं, दीपों की लौ आकाश तक चमकने लगी। भक्त के आँसुओं में भी अब विश्वास की ज्योति दमकने लगी। ✨प्रभु ने कहा —😮🤔 “जो मेरे द्वार पर सच्चे मन से आता है, मैं उसका हर दुख अपने हृदय में छुपाता हूँ। भक्ति केवल शब्दों से नहीं होती, सच्चा प्रेम ही मुझे सबसे अधिक भाता है।”🙏🏻 ✨भक्त ने चरणों में सिर झुका दिया, उसका काँपता मन अब शांत हो गया। जिस हृदय में निराशा का अंधेरा था, वहीं अब प्रभु का प्रकाश भर गया।🙏🏻 ✨पुरी की पावन धरती पर भक्ति की यह अमर कहानी गूँजती है। जहाँ जगन्नाथ अपने भक्तों के लिए हर पल प्रेम और दया बरसाते हैं।😀 ✨जो सच्चे मन से उन्हें पुकारता है, प्रभु कभी उसे अकेला नहीं छोड़ते। आँसू चाहे कितने भी गहरे हों, जगन्नाथ अपने भक्तों का हाथ कभी नहीं छोड़ते।🙏🏻😮🤔 🙏‼️ Jai Jagannath ‼️🙏

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