
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
43 days ago
*रावण की चिता जल रही थी। चारों ओर सन्नाटा था। जिस रावण के नाम से देवता भी काँपते थे वही रावण अग्नि की लपटों में धू धूकर जल रहा था। मंदोदरी कुछ दूर ख़डी चुपचाप सब देख रही थी। कुछ देर बाद वह राम के निकट आयी। आँखों में आंसू थे। कांपती हुई आवाज में बोली - प्रभु, मेरे पति यदि अधर्मी थे तो उन्हें इतना ज्ञान, इतनी शक्ति और इतनी भक्ति क्यों मिली? कुछ क्षण चुप रहने के बाद राम बोले - हे देवी, ज्ञान किसी को महान नहीं बनाता। शक्ति किसी को अमर नहीं बनाती। भक्ति भी तब तक अधूरी है जबतक उसमें विनम्रता न हो। रावण के पास सबकुछ था, बस अपनी गलती स्वीकार करने का साहस नहीं था। मंदोदरी ने अश्रुपूर्ण नेत्रों से अंतिम बार चिता की ओर देखा और श्रीराम को प्रणाम किया। श्रीराम बोले - हे माते, मनुष्य का अंत उसकी कमजोरीयों से ही नहीं, उसके अहंकार से होता है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी रामायण में लिखा है....* *दया धरम कामूल है, पापमूल अभिमान।* *तुलसी दया न छोड़िये ज़ब लक घट में प्राण।।* 🌺🌺🌳🌳🌳🌳🌳🌺🌺 *ट्रेन में जनरल से एसी डिब्बे की दूरी चंद मीटर की होती है,* *पर ये दूरी तय करने के लिए लोगों को वर्षों लग जाते हैं।* 🌺🌺🌳🌳🌳🌳🌳🌺🌺 *हजार गम हैं, खुलासा कौन करे...?* *मुस्कुरा देता हूँ, तमाशा कौन करे?* 🌺🌺🌳🌳🌳🌳🌳🌺🌺 *कैमरे लगे हैं मंदिर मस्जिद में...* *और लोग कहते हैं ऊपर वाला सब देख रहा है!* *🙏नमस्कार ☕ शुभप्रभात🙏*

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