
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
144 days ago
_पहाटे तुलसी को पानी क्यों देना चाहिए?_ हमारे पूर्वजों ने पहाटे हर किसी को तुलसी को पानी देना चाहिए ऐसा कहा है। इसके पीछे दो महत्वपूर्ण कारण हैं। 1. अध्यात्मिक महत्व - इसके बारे में पुराणों में एक कथा है। जालिंदर नाम का एक अत्यंत पराक्रमी राक्षस होता है। अपनी पराक्रम के बल पर उसने देवों और साधू-संतों को त्राहीत्राही कर दिया होता है। उसे कैसे रोकना है, ऐसा सवाल सभी देवों को पड़ता है। तब देव विष्णू को शरण जाकर जालिंदर से अपना रक्षण करने की विनती करते हैं। विष्णू ने जब जालिंदर के बारे में जानकारी ली, तब उन्हें पता चलता है कि, उसकी पत्नी वृंदा सतीपतीव्रता होती है। उसके पातिव्रत्य के सामर्थ्य से ही जालिंदर विजयी होता है। उसे पराजीत करने के लिए वृंदा के पतिव्रत्य का भंग करना ही एक उपाय होता है। यह काम करने कोई तैयार नहीं होता। आखिर यह जिम्मेदारी विष्णू स्वीकार करते हैं। जालिंदर का रूप धारण कर विष्णू वृंदा के महल में जाते हैं। अपने पति आए हैं ऐसा समझकर वृंदा उन्हें आलिंगन देती है। उसके पतिव्रत्य का भंग होते ही, जालिंदर का मृत्यु हो जाता है। देवों के बाण से उसका शीर टूटकर वृंदा के दरवाजे में पडता है। नवरे का शीर देखकर वृंदा चकित हो जाती है और विष्णू को पूछती है, तुम कौन हो? तब विष्णू अपने असली रूप में प्रकट होते हैं। संतप्त वृंदा विष्णू को तू पत्थर हो जाएगा और मुझे मेरे पति का विरह तूने किया, वैसे ही तुझे भी अपनी पत्नी का विरह सहन करना पडेगा, ऐसा शाप देती है। भगवंत उसकी क्षमा मांगते हैं। तब वृंदा कहती है, तूने मुझे भ्रष्ट किया, अब मुझे कौन स्विकारीगा? तब भगवंत कहते हैं, 'मैं तेरा स्वीकार करता हूँ। इतना ही नहीं, जो तेरी पूजा करेंगे उनपर मेरी कृपा रहेगी।' इसके बाद वृंदा सती हो जाती है। आगे उसके शाप के कारण ही राम अवतार में भगवंत को सीता का विरह सहन करना पडा। देव पत्थर हो गए। उसे 'शालिग्राम' कहते हैं। जिस जगह उसका अंत्यसंस्कार हुआ, वहाँ तुलसी का पौधा उगा। वही यह तुलसी। वृंदा के नाम से ही जिस जगह तुलसी लगाई जाती है, उसे 'वृंदावन' कहते हैं। वही तुलसी कृष्ण ने, पांडुरंग ने भी धारण की। उसे भगवंत ने स्वीकार किया इसका प्रतीक है 'शालिग्राम' जो पत्थर है, उसका विवाह तुलसी से किया जाता है। वह भगवंत की प्रिय है, इसलिए उसे धारण करने वालों पर भगवंत प्रेम करते हैं, ऐसी श्रद्धा है। 2. वैज्ञानिक महत्व - दुनिया का हर एक वनस्पति दिन में ऑक्सिजन-O2 और रात में कार्बन डाय ऑक्साईड-CO2 छोडता है। अपवाद है पिंपळ, क्योंकि पिंपळ रात में भी ऑक्सिजन छोडता है। इसलिए भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि, सभी वृक्षों में मैं अश्वथ-पिंपळ हूँ। लेकिन तुलसी दुनिया का एकमेव वनस्पति है जो दिन में ऑक्सिजन, रात में कार्बन डाय ऑक्साईड और सिर्फ पहाटे 0.03% ओझोन-O3 वायु छोडती है। इस वायु के संपर्क में मनुष्य आने पर उसके दिमाग में 5HTPn-सेरॉटोनीन नामक संप्रेरक (Neurotransmiter) स्त्रवित होता है। जिससे मनुष्य दिनभर प्रसन्न और आनंदी रहता है। साथ ही उसकी रोग प्रतिकारक शक्ति (Immune System) मजबूत होती है। आयुर्वेद के अनुसार तुलसी से सर्दी, खांसी, बुखार, त्वचारोग, मधुमेह, रक्तचाप, पेट के और किडनी के विकार, कॅन्सर नहीं होते। क्योंकि तुलसी के बीज, जड, तना, पत्ते, फूल (मंजिरी) यह सभी औषधी हैं। साथ ही तुलसी से निकलने वाले शुभ स्पंदन से वातावरण शुद्धी होती है। इन सभी बातों का गहन विचार कर हमारे पूर्वजों ने पहाटे तुलसी को पानी देने को कहा है।
Comments (2)

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Apr 8, 2026
जय शिव शंकर शंभू धन्यवाद 🙏

vijay kushwaha
Apr 8, 2026
हर हर महादेव
