
Rama Devi Sahu
174 days ago
तेरा #हाथ .... है जो सर पर! इस तेरा को #मेरा कर दो... वो सब कहते हैं , मेरे को तेरा कर दो. सिर्फ गुमराह करते हैं! "मैं खोजता रहा उसे #आकाश में… मंदिरों में…,आश्रमों में मंत्रों में…व्यक्तित्वों में मैं पुकारता रहा — गुरुओं की चौखट पर “#बाप… मेरा हाथ पकड़ो” और एक दिन… मौन में उत्तर मिला. #हाथ तो था… पर बाहर से नहीं। स्पर्श तो था… पर किसी और का नहीं. जिसे मैं #बाप” कहता था — वह कोई अलग सत्ता नहीं थी. वह तो मेरा ही परिपक्व, परम, जागृत स्वरूप था. मैं ही अधूरा था, वह मेरा पूर्ण था. मैं ही डरा हुआ था, वह मेरा निडर रूप था. जब मैं परिपक्व हुआ — वह बाहर से भीतर आ गया. जब मैं जागा — वह “वह” नहीं रहा… “मैं” बन गया.

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