MyMandirInstall
Profile

Rama Devi Sahu

56 days ago

जगन्नाथ धाम की पहचान सिर्फ भगवान जगन्नाथ के भव्य मंदिर से नहीं, बल्कि उसके शिखर पर विराजमान नील चक्र से भी जुड़ी है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाने वाला यह दिव्य चक्र मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण पहचान में से एक है। माना जाता है कि नील चक्र के दर्शन और प्रणाम किए बिना जगन्नाथ धाम की यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। अष्टधातु (लोहा, तांबा, जस्ता, पारा, सीसा, पीतल, चांदी और सोना) से बना यह विशाल चक्र मंदिर के शिखर पर स्थापित है। इसकी ऊंचाई लगभग साढ़े तीन मीटर बताई जाती है और इसे मंदिर का मुकुट भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नील चक्र भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतीक है। चूंकि भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है, इसलिए यह चक्र उनके दिव्य रक्षक के रूप में मंदिर के शिखर पर स्थापित है। पुरी की परंपराओं में नील चक्र का विशेष महत्व है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह चक्र न केवल मंदिर की पवित्रता की रक्षा करता है, बल्कि नकारात्मक शक्तियों से भी इसकी सुरक्षा करता है। श्रद्धालु इसे भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन के समान मानते हैं और विश्वास करते हैं कि इसके दर्शन से मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। नील चक्र केवल एक स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण नहीं, बल्कि सदियों से करोड़ों भक्तों की अटूट श्रद्धा, विश्वास और सनातन परंपरा का प्रतीक भी है। यही कारण है कि जगन्नाथ धाम पहुंचने वाला हर श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के साथ-साथ नील चक्र को भी नमन करना अपनी यात्रा का अभिन्न हिस्सा मानता है। 🙏🚩 Jai Jagadish 🚩🙏

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!