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Rama Devi Sahu

409 days ago

🙏‼️ Jai Shree Hari ‼️🙏 Dt.17.07.2025 (Thursday) *************************** बेहद विचलित भरत ने गुरुवर से पूछा - राम सीता का विवाह शुभ मुहूर्त में हुआ । राज्याभिषेक का मुहूर्त भी प्रकांड विद्वान त्रिकालदर्शी गुरुजनों ने निकाला । तब राम जानकी को सिंहासन की बजाय वनवास क्यूं मिला ? तमाम शास्त्र विफल कैसे हो गए ? तब गुरु वशिष्ठ ने भरत को बैठाया और शांत भाव से मुस्कुराते हुए कहा - सुनहु भरत भावीं प्रबल बिलखी कहेहूं मुनिनाथ हानि लाभ जीवन मरण जस अपजस विधि हाथ अर्थात जो विधि ने निर्धारित किया वह होकर रहेगा । विधि के लिखे को न शास्त्र बदल सकते हैं , न ज्योतिष , न भाग्य , न वर्तमान । यह सब विधि अर्थात विधाता के हाथ है । इस अनादि ब्रह्म के नियंता विधाता ने जो लिख दिया सो लिख दिया । मुहूर्त में भला इतनी शक्ति कहां कि वह विधि का लेख बदल दे । होनी प्रबल है और घटकर रहेगी । भावीं का लिखा मतलब कर्मों का लिखा । करमन की गति न्यारी साधो करमन की गति न्यारी । चाहे लाख करे चतुराई करम का लेख मिटे ना रे भाई । भावीं ही थी जिसने संसार के सबसे प्रबल साम्राज्य अयोध्या को सूना कर दिया । सब अकेले अकेले । राम सीता वन में अकेले फिर सीता लंका में अकेली । वैधव्य झेलती कौशल्या , सुमित्रा अकेली । अपार पापबोध में घिरीं संत्रास और आत्मधिक्कार सहती कैकेई अकेली । मंथरा अकेली , उर्मिला अकेली , मांडवी अकेली , श्रुतकीर्ति अकेली । सूनी अयोध्या सूनी जनकपुरी प्रजा अकेली । शोक की छाया तले गुरु अकेले तपस्या अकेली साधना अकेली । विधि ने जो रचा वह होकर रहेगा । सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र इसी बलवान होनी के चलते डोम बने और पत्नी से पुत्र का शुल्क मांग लिया । शकुंतला दर दर भटकीं , दुष्यंत सब भूल गए , मायावी कृष्ण को भील के एक बाण ने अंत तक पहुंचा दिया । दशरथ का तीर श्रवण कुमार को लगा । विधि के कारण ही शिव से ली गई सोने की लंका जली । सती की मृत्यु को शिव टाल न पाए , पुत्र दक्ष को ब्रह्मा समझा न पाए और मोहिनी रूप धरकर भी विष्णु ने राक्षस को अमृतपान करा दिया । अपने प्रारब्ध को न कंस टाल पाए , न रावण , न परीक्षित और न रामकृष्ण परमहंस । शास्त्र गवाह हैं कि मानव अपने जन्म के साथ ही मृत्यु लिखवाकर लाता है । लाभ हानि जीवन मरण यश अपयश विधि के हाथ हैं । विधि परमात्मा के आधीन है । उसके लिखे मिटे न मिटाए । या धरती ही क्या , यह ब्रह्मांड ही क्या , यह संपूर्ण चराचर उस अनंत परमात्मा से बंधा है । वही हमें बनाता है , वही चलाता है , वही मिटाता है । वही लिखता है जिंदगी के पल , बरस और अंत । उस विधाता ने कर्मफल समय को सौंप दिया है । गीता में उसने साफ कह दिया कर्म कर फल मैं दूंगा । प्रारब्ध और पुरुषार्थ एक दूजे से बंधे हैं । गुरु वशिष्ठ ने जो कहा , वह संसार सार है । किसी भी क्षेत्र में हों , विधि विधान पर भरोसा रखें । #जय_श्रीहरि 🚩🙏

Comments (8)

Deepak  karki

Deepak karki

Jul 17, 2025

🔱🔔🙏🌹ॐ नमो भगवते वासुदेवाय श्री हरी बिष्णु भगवान शुभ रात्रि वंदन बहन जी 🔱🔔🙏🌹

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Jul 17, 2025

🙏🙏🙏🙏🙏

Radhe Radhe

Radhe Radhe

Jul 17, 2025

🌹🌹 शुभ रात्री गुरुवार की शुभकामनाएं 🌹🌹

विद्या सागर शुक्ल

विद्या सागर शुक्ल

Jul 17, 2025

बहुत ही सुन्दर, ज्ञान वर्धक बातें

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Jul 17, 2025

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🙏 बहुत ही सुन्दर पोस्ट है बहना जी 👌👌👌👍 शुभ संध्या वंदन 🙏🌹😊

ranjit  chavda

ranjit chavda

Jul 17, 2025

🙏🔔🔔शुभ गुरुवार जी,ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः,ॐ साईं बाबा शुभ दिन की सुभकामनाये जी 🔔🔔🙏

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

RAKESH SHARMA OM NAMH SHIVAY 🥀🚩

Jul 17, 2025

NICE VIEW 👍 EXCELLENT POST 👌❤️🥀🌹🙏