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Rohit Patel

341 days ago

🍁🛕🌺👏🕉️👏🌺🛕🍁 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹 🌈 *दिनांक - 23 सितम्बर 2025* 🌈 *दिन - मंगलवार* 🌈 *विक्रम संवत 2082 (गुजरात-महाराष्ट्र अनुसार 2081)* 🌈 *शक संवत -1947* 🌈 *अयन - दक्षिणायन* 🌈 *ऋतु - शरद ॠतु* 🌈 *मास - आश्विन* 🌈 *पक्ष - शुक्ल* 🌈 *तिथि - द्वितीया 24 सितम्बर प्रात: 04:51 तक तत्पश्चात तृतीया* 🌈 *नक्षत्र - हस्त दोपहर 01:40 तक तत्पश्चात चित्रा* 🌈 *योग - ब्रह्म रात्रि 08:23 तक तत्पश्चात इन्द्र* 🌈 *राहुकाल - शाम 03:32 से शाम 05:03 तक* 🌈 *सूर्योदय - 06:28* 🌈 *सूर्यास्त - 06:32* 🪷🌺🪷🌺🪷🌺🪷 🕉️⏭️ *दिशाशूल - उत्तर दिशा मे* 🚩 *व्रत पर्व विवरण - पूज्य बापूजी का 61वां आत्मसाक्षात्कार दिवस,चंद्र-दर्शन (शाम 06:22 से रात्रि 07:05 तक)* ✨ *विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺 🍁 *शारदीय नवरात्रि* 🍁 🙏🏻 *अश्विन मास के नवरात्रि का आरंभ 22 सितम्बर, सोमवार से हो गया है। मान्यता है कि नवरात्रि में रोज देवी को अलग-अलग भोग लगाने से तथा बाद में इन चीजों का दान करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है। जानिए नवरात्रि में किस तिथि को देवी को क्या भोग लगाएं-* 🙏🏻 *नवरात्रि की द्वितीया तिथि यानी दूसरे दिन माता दुर्गा को शक्कर का भोग लगाएं ।इससे उम्र लंबी होती है ।* 🕉️⏭️ शेष कल............ 🌹🌸🌹🌸🌹🌸🌹🌸 🍁 *शारदीय नवरात्रि* 🍁 🙏🏻 *अश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक शारदीय नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। इस बार शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 22 सितम्बर, सोमवार से हो गया है, धर्म ग्रंथों के अनुसार, जानिए नवरात्रि में किस दिन देवी के कौन से स्वरूप की पूजा करें-* ⚜️ *तप की शक्ति का प्रतीक है मां ब्रह्मचारिणी* 🙏🏻 *नवरात्रि की द्वितीया तिथि पर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी ब्रह्मचारिणी ब्रह्म शक्ति यानी तप की शक्ति का प्रतीक हैं। इनकी आराधना से भक्त की तप करने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही, सभी मनोवांछित कार्य पूर्ण होते हैं।* 🙏🏻 *मां ब्रह्मचारिणी हमें यह संदेश देती है कि जीवन में बिना तपस्या अर्थात कठोर परिश्रम के सफलता प्राप्त करना असंभव है। बिना श्रम के सफलता प्राप्त करना ईश्वर के प्रबंधन के विपरीत है। अत: ब्रह्मशक्ति अर्थात समझने व तप करने की शक्ति हेतु इस दिन शक्ति का स्मरण करें। योगशास्त्र में यह शक्ति स्वाधिष्ठान चक्र में स्थित होती है। अत: समस्त ध्यान स्वाधिष्ठान चक्र में करने से यह शक्ति बलवान होती है एवं सर्वत्र सिद्धि व विजय प्राप्त होती है।* 🕉️⏭️ शेष कल........... 🌞~*आज का हिन्दू पंचांग*~🌞 🚩✊जय हिंदुत्व✊🚩 🍁 *नवरात्रि में त्रिदेवी आराधना* 🍁 🙏🏻 *नवरात्रि में 9 तिथियों को 3-3-3 तिथि में बांटा गया है। प्रथम 3 तिथि माँ दुर्गा की पूजा (तमस को जीतने की आराधना), बीच की तीन तिथि माँ लक्ष्मी की पूजा (रजस को जीतने की आराधना) तथा अंतिम तीन तिथि माँ सरस्वती की पूजा (सत्व को जीतने की आराधना) विशेष रूप से की जाती है।* 🙏🏻 *दुर्गा की पूजा करके प्रथम तीन दिनों में मनुष्य अपने अंदर उपस्थित दैत्य, अपने विघ्न, रोग, पाप तथा शत्रु का नाश कर डालता है। उसके बाद अगले तीन दिन सभी भौतिकवादी, आध्यात्मिक धन और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी लक्ष्मी की पूजा करता है। अंत में आध्यात्मिक ज्ञान के उद्देश्य से कला तथा ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना करता है ।* 🕉️⏭️ *अब मैं तीनों शक्तियों की आराधना के मूल मंत्रों का वर्णन करता हूँ। नवरात्र में इनका यथासंभव जप करना चाहिए।* 🙏🏻 *१. दुर्गाजी का उत्तमोत्तम नवार्ण मंत्र महामंत्र है। इसको मंत्रराज कहा गया है। नवार्ण मंत्र की साधना धन-धान्य, सुख-समृद्धि आदि सहित सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करती है।* ✨ *“ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”* 🙏🏻 *२. लक्ष्मी जी का मूल मंत्र जिसके द्वारा कुबेर ने परमऐश्वर्य प्राप्त किया था ।* ✨ *“ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा”* 🙏🏻 *३. सरस्वती जी का वैदिक अष्टाक्षर मूल मंत्र जिसे भगवान शिव ने कणादमुनि तथा गौतम को, श्रीनारायण ने वाल्मीकि को, ब्रह्मा जी ने भृगु को, भृगुमुनि ने शुक्राचार्य को, कश्यप ने बृहस्पति को दिया था जिसको सिद्ध करने से मनुष्य बृहस्पति के समान हो जाता है ।* ⚜️ *“श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा”* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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Comments (4)

Rohit  Patel

Rohit Patel

Sep 23, 2025

जी रमा जी शुभ दोपहर जी 🍨🤝🤗💞💞💞💞

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 23, 2025

Sharadiya Navaratri ke Dusre Din ki Hardik Shubhkamnaye ke Sath Subha Dopahar Jii 🙏 Maa ki Aasirbad Aap pr Hamesha Bani Rahe 🙏🌹🌹🥀🥀

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 23, 2025

🙏🌺 Sarva Mangal Mangalye Shive Sarvarth Sadhike Sharanya Trayambake Gouri Narayani Namostute 🙏🌺

Rohit  Patel

Rohit Patel

Sep 22, 2025

🕉️ शारदीय नवरात्रि - द्वितीय दिवस मां ब्रह्मचारिणी ‼️🛕💐👏🕉️👏💐🛕‼️ 🚩✊हर हर महादेव✊🚩 🌹नवदुर्गा में माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी🌷‼️ 🙏🏻या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता,🌷 🙏🏻 नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।🌹🙏🏻 🌷दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।🙏🏼 🌷देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा..।।🙏🏼 मित्रों आज नवरात्र का दूसरा दिन है। आज मां ब्रह्माचरिणी की पूजा - अर्चना की जाती है। मां का यह रूप बहुत ही ज्यादा मोहक है। जब भगवान शिव ने अपने आपको अग्नि का स्वरूप बना लिया। उसके बाद मां ने पहाड़ पर जाकर तपस्या की थी। इसी कारण से ही मां का नाम ब्रह्मचारिणी मां के पूजन से जीवन के सभी कष्टों से छुटकारा प्राप्त होता है तो आइए जानते हैं दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें महत्व, पूजा विधि, माता शैलपुत्री की कथा, मंत्र और आरती। 👣 मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप‼️ मां ब्रह्मचारिणी ने सफेद वस्त्र धारण किए हैं। मां के एक हाथ में जाप के लिए माला है और दूसरे हाथ में कमंडल है इन्हें साश्रात् ब्रह्म का रूप माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कृपा और भक्ति की प्राप्ति होती है। मां का यह स्वरूप अपने भक्तों को भक्ति में लीन रहना सीखाता है। इस रूप में मां अपने भक्तों को अपने कर्तव्य के प्रति लग्न और निष्ठा प्रदान करती हैं। जिस तरह से मां ने जब तक भगवान शिव को पा नहीं लिया था। तब तक वह तपस्या करती रही थी। उसी प्रकार से मनुष्य भी जब तक अपने लक्ष्य को प्राप्त न कर ले उसे भी अपनी कोशिश नहीं छोड़नी चाहिए। 👣 मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का महत्व‼️ मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। यह मां पार्वती का दूसरा स्वरूप माना जाता है। मां के इस रूप में पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। ब्रह्मचारिणी मां की पूजा से उनके भक्तों को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। मां का रूप अत्यंत ही तेजस्वीं और भव्य है। नवरात्रों में मां के इस स्वरूप की पूजा करने से जीवन के सभी कष्टों से छुटकारा प्राप्त होता है। इसलिए इनकी पूजा दूसरे नवरात्र में अवश्य करनी चाहिए। मां ब्रह्मचारिणी का विधिवत पूजन से जीवन में सदाचार और नियम से जीने की सीख मिलती है। 👣 मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि‼️ 1.नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। 2. इसके बाद मां की प्रतिमा को किसी चौकी पर स्थापित करें दूध, दही, शर्करा, घृत, व मधु से स्नान कराएं 3. इसके बाद मां कोअरूहूल का फूल व कमल फूल, अक्षत, रोली और चंदन से मां की विधिवत पूजा करें। पूजा करने से पहले हाथ में फूल लेकर इधाना कदपद्माभ्याममक्षमालाक कमण्डलु देवी प्रसिदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्त्मा मंत्र का जाप करें। 4.इसके बाद मां की कथा सुनें और धूप व दीप से आरती उतारें। 5. अंत मे मां को मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद बांटे और मां से प्रार्थना करें। 👣 मां ब्रह्मचारिणी की कथा ...‼️ पौराणिक कथाओं के अनुसार जब भगवान शिव से माता पार्वती ने विवाह करने की इच्छा प्रकट की थी। इसके बाद वह अपने माता पिता को भी अपने विवाह के लिए मनाने की कोशिश करने लगी। लेकिन इसके बाद भी माता पार्वती से भगवान शिव को कामुक करने के लिए कामदेव से मदद मांगी। माना जाता है कि एक बार भगवान शिव अपनी तपस्या में लीन थे। उसी समय कामदेव ने कामवासना का तीर भगवान शिव पर छोड़ दिया। जिससे भगवान शिव की तपस्या भंग हो गई और भगवान शिव कामदेव पर अत्याधिक क्रोधिक हो गए। जिसके बाद उन्होंने अग्नि का रूप ले लिया और स्वंय के साथ- साथ कामदेव को भी जला दिया। जब भगवान शिव ने अग्नि का स्वरूप ले लिया तो माता पार्वती ने सभी कुछ त्याग कर भगवान शिव की तरह ही जीना आरंभ कर दिया। माता पार्वती ने पहाड़ पर जाकर कई सालों तक तपस्या की इसी कारण से ही उन्हें ब्रह्मचारिणी के नाम से भी जाना जाता है। माता पार्वती ने इतनी कठोर तपस्या की उन्होंने भगवान शिव का ध्यान अपनी और आकर्षित कर लिया। इसके बाद भगवान शिव रूप बदलकर माता पार्वती के सामने जाकर प्रकट हो गए। और अपनी ही बुराई करने लगे। लेकिन माता पार्वती ने उनकी कोई भी बात नहीं सुनी और उन्हें ही सुना दिया। जिसके बाद भगवान शिव अपने असली रूप में आए और उन्हें विवाह का वचन दे दिया। 👣 मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र...‼️ 1.या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।। ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥ 2. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ 3.ध्यान मंत्र वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥ गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्। धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम्॥ परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन। पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥ 4.स्त्रोत : तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी। शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥ 5.कवच मंत्र : त्रिपुरा में हृदयम् पातु ललाटे पातु शङ्करभामिनी। अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥ पञ्चदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी॥ षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो। अङ्ग प्रत्यङ्ग सतत पातु ब्रह्मचारिणी॥ 👣 मां ब्रह्मचारिणी की आरती ....‼️ जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता। ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो। ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सकल संसारा। जय गायत्री वेद की माता। जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता। कमी कोई रहने न पाए। कोई भी दुख सहने न पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने। जो ​तेरी महिमा को जाने। रुद्राक्ष की माला ले कर। जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना। मां तुम उसको सुख पहुंचाना। ब्रह्माचारिणी तेरो नाम। पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी। रखना लाज मेरी महतारी। ।।श्री ब्रह्मचारिण्यै नमो नमः।। 🌅🏯!!श्री हरि: शरणम्!!🏯🌅 🍂🎋🍃🎋⚛️🎋🍃🎋🍂 🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿