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Rama Devi Sahu

450 days ago

🙏‼️ Om Namo Bhagavate Vasudevaya Namah ‼️🙏 Aap Sabhi ko " Nirjala Ekadashi " ki Hardik Shubhkamnaye 🙏🙏 निर्जला एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और कठिन व्रतों में से एक है, जो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत 6 जून, शुक्रवार को रखा जाएगा । निर्जला एकादशी का अर्थ और महत्व "निर्जला" का अर्थ है "बिना जल के"। इस व्रत में उपवासी व्यक्ति पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करता है, जिससे यह सबसे कठोर एकादशी मानी जाती है। मान्यता है कि इस एक व्रत के पालन से वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है । व्रत की कथा: भीमसेनी एकादशी महाभारत काल में, पांडवों में से भीम को भूख अधिक लगती थी, जिससे वे एकादशी व्रत नहीं रख पाते थे। उन्होंने ऋषि वेदव्यास से समाधान पूछा, तो ऋषि ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का निर्जला व्रत रखने की सलाह दी, जिससे उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त होगा। भीम ने इस कठिन व्रत को किया, इसलिए इसे "भीमसेनी एकादशी" भी कहा जाता है । व्रत की विधि पूर्व संध्या: व्रत से एक दिन पहले हल्का सात्विक भोजन करें और अधिक जल पिएं। व्रत का दिन: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। पूजा सामग्री: तुलसी पत्र, फूल, चंदन, धूप-दीप, पंचामृत और नैवेद्य। मंत्र जाप: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करें। दान: जल से भरा कलश, शरबत, वस्त्र या अन्न का दान करें । क्या करें और क्या न करें करें: भगवान विष्णु की पूजा और कथा पाठ। जरूरतमंदों को जल और अन्न का दान। धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन और मंत्र जाप। न करें: तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) का सेवन। क्रोध, झूठ, द्वेष और अपशब्दों से बचें। दिन में सोना और शारीरिक श्रम से परहेज करें । व्रत का पारण व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है। वर्ष 2025 में, पारण 7 जून को दोपहर 1:44 बजे से शाम 4:31 बजे के बीच करना शुभ माना गया है विशेष जानकारी जो व्यक्ति स्वास्थ्य कारणों से व्रत नहीं रख सकते, वे भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप कर इस दिन का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं । इस प्रकार, निर्जला एकादशी आत्मसंयम, भक्ति और तपस्या का प्रतीक है, जो मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। 🙏 #भीमसेनी_एकादशी 🙏

Comments (2)

Deepak  karki

Deepak karki

Jun 6, 2025

nirjala ekadasi ki hardik shubhkamnaye

प्रभा त्रिपाठी

प्रभा त्रिपाठी

Jun 6, 2025

जय श्री राम राम राम सीताराम