
Rama Devi Sahu
75 days ago
राम शब्द राम मौन राम ही तो शोर हैं: जब हम कुछ बोलते हैं, तो उस वाणी या शब्द में राम हैं। जब हम पूरी तरह शांत (मौन) होते हैं, तो उस अंतरात्मा की शांति में भी राम हैं। और संसार में जो भी कोलाहल या जीवन का शोर सुनाई देता है, वह भी उन्हीं की चेतना की वजह से है। राम इधर राम उधर राम ही हर ओर हैं: ईश्वर किसी एक दिशा या स्थान तक सीमित नहीं हैं। यदि आप इधर देखेंगे तो भी राम हैं, उधर देखेंगे तो भी राम हैं। संसार की हर दिशा और हर कोने में केवल उन्हीं का वास है। राम धुप राम छाँव राम मेघ घनघोर हैं: जीवन के जो अलग-अलग रंग और रूप हैं, वे सब राम ही हैं। सुख की कड़कती 'धूप' भी राम हैं और संकट में मिलने वाली ठंडी 'छाँव' भी राम हैं। आकाश में घिरकर आने वाले गहरे, काले बादल (घनघोर मेघ) जो धरती को जीवन देते हैं, वे भी राम का ही एक रूप हैं। राम सूर्य राम किरण राम ही तो भोर हैं: ब्रह्मांड को ऊर्जा देने वाले महाप्रतापी 'सूर्य' राम हैं, उस सूर्य से निकलने वाली एक-एक जीवनदायी 'किरण' राम हैं, और अंधकार को मिटाकर जो नई सुबह (भोर) होती है, वह भोर भी स्वयं राम ही हैं।

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