MyMandirInstall

🇮🇳 बिना सिंध के हिंद अधूरा है 🇮🇳 जब भी हम गर्व से राष्ट्रगान गाते हैं — “पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल, बंग…” — तब सिंध का नाम हमें हमारी साझा सभ्यता, संस्कृति और इतिहास की याद दिलाता है। आज पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहने वाले अनेक सिंधी हिंदुओं और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव, असुरक्षा और उत्पीड़न की खबरें समय-समय पर सामने आती रहती हैं। उनकी पीड़ा केवल एक समुदाय की पीड़ा नहीं, बल्कि मानवता की पीड़ा है। हर भारतीय का दिल उनके लिए संवेदना से भर उठता है। हम मानते हैं कि यदि किसी भी समाज को न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिले, तो अत्याचार की गुंजाइश कम हो जाती है। भारत की लोकतांत्रिक परंपरा हमें यही सिखाती है कि हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। सिंध केवल एक भूभाग नहीं, वह सिंधु सभ्यता की जन्मभूमि, हमारे प्राचीन गौरव और सांस्कृतिक स्मृति का प्रतीक है। राष्ट्रगान में सिंध का नाम हमारी सांस्कृतिक एकता और ऐतिहासिक संबंधों का सम्मान है। आइए, हम इतिहास पर गर्व करें, पीड़ितों के प्रति संवेदना रखें और न्याय, मानवाधिकार तथा सांस्कृतिक सम्मान की आवाज़ बुलंद करें। गर्व से कहो — हम भारतीय हैं! 🇮🇳 जय हिंद! भारत माता की जय! 🇮🇳🔥

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!