
Rama Devi Sahu
4 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 18 अक्टूबर 2026* *⛅दिन - रविवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - आश्विन* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - सप्तमी सुबह 08:27 तक तत्पश्चात् अष्टमी* *⛅नक्षत्र - पूर्वाषाढा दोपहर 12:49 तक उत्तराषाढा* *⛅योग - सुकर्मा रात्रि 11:56 तक तत्पश्चात् धृति* *⛅राहुकाल - शाम 04:32 से शाम 05:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:25* *⛅सूर्यास्त - 05:59 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:46 से प्रातः 05:35 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:49 से दोपहर 12:35 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:47 से मध्यरात्रि 12:37 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - रविवारी सप्तमी (सूर्योदय से सुबह 08:27 तक), सर्वार्थसिद्धि योग (दोपहर 12:49 से सूर्योदय तक), सरस्वती बलिदान* *🌥️विशेष - अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *श्रीरामचरितमानस* *जुग सम नृपहि गए दिन तीनी। कपटी मुनि पद रह मति लीनी॥* *समय जान उपरोहित आवा। नृपहि मते सब कहि समुझावा॥4॥* भावार्थ:-राजा को तीन दिन युग के समान बीते। उसकी बुद्धि कपटी मुनि के चरणों में लगी रही। निश्चित समय जानकर पुरोहित (बना हुआ राक्षस) आया और राजा के साथ की हुई गुप्त सलाह के अनुसार (उसने अपने) सब विचार उसे समझाकर कह दिए॥4॥ दोहा : *नृप हरषेउ पहिचानि गुरु भ्रम बस रहा न चेत।* *बरे तुरत सत सहस बर बिप्र कुटुंब समेत॥172॥* भावार्थ:-(संकेत के अनुसार) गुरु को (उस रूप में) पहचानकर राजा प्रसन्न हुआ। भ्रमवश उसे चेत न रहा (कि यह तापस मुनि है या कालकेतु राक्षस)। उसने तुरंत एक लाख उत्तम ब्राह्मणों को कुटुम्ब सहित निमंत्रण दे दिया॥172॥ *🙏🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩 🙏*
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