
प्रभा त्रिपाठी
432 days ago
आज के विचार “श्रीकृष्णसखा ‘मधुमंगल’ की आत्मकथा-111” ( तब नंदनंदन दह तैं निकसे...) 24, 6, 2025 ***************************************** कल तै आगै कौ प्रसंग - मैं मधुमंगल ..... इधर तट पे ......ग्वाल बाल , मैया , बृजराज बाबा सब अपार दुःख के सागर में डूबे हते ....बस इनके प्राण बचे हे , दाऊ भैया के या आश्वासन पे ....कि कन्हैया आवैगौ । कन्हैया बा कालीय कूँ परास्त करके आवैगौ । हलाहल विष कूँ पचाय के आवैगौ । लेकिन कब ? दाऊ ! अब तौ बहुत समय है गयौ ....और हृद कौ जल हूँ दाऊ ! लाल है गयौ है ...हाय हाय ! मेरे लाला कूँ कालीय खाय गयौ .......बृजरानी की स्थिति फिर बिगड़ी है ....वो फिर बिलखवे लगीं .....लाला के वियोग में उनकी साँस अटकवे लगी .....बृजराज बाबा हूँ अब ठाढ़े नही है पा रहे ....पुत्र के वियोग ने उनके देह कूँ तोड़ दियौ है ....अब तौ देह में तनिक हूँ शक्ति नही रही .......हम सब ग्वाल बाल .......मैं गयौ दाऊ भैया के पास ...और पूछवे लग्यो ....लाला सुरक्षित तौ है ना ? मेरे नेत्रन तै अश्रु झर रहे जब मैं जे पूछ रो । तब दाऊ ने मेरे काँधे पे हाथ धरके बड़े प्रेम तै एक बात कही .....मधुमंगल ! कन्हैया कौ कोई कछु नाँय बिगाड़ सके ....फिर किंचित मुस्कुराते भए दाऊ बोले ...मोकूँ तौ बा कालिय नाग की चिंता लगी है कि ....वो सुरक्षित है या नही । दाऊ कूँ ऐसे कहते देखके मोकूँ थोड़ी राहत मिली .....मैं दाऊ के पास तै अब सखान कै पास आय गयौ । तोक सखा मोते रोतौ भयौ पूछ रो ......दाऊ भैया कहा कह रहे ? मैंने कही ....कन्हैया कूँ कछु नही होयगौ ....वो पूर्ण सुरक्षित है ......मेरी बात सुनके श्रीदामा बोलो .....फिर जे लाल रंग या हृद कौ कैसे भयौ ? मैंने कही ...कन्हैया ने कालिय कूँ नथ दियौ होयगौ । तभी .....एकाएक हृद कौ जल हिलवे लग्यो .....सब घबरा गए ....उठ के खड़े है गए .... और देखते ही देखते .....मोर मुकुट धारी बाहर निकस्यो ....आहा ! कन्हैया कूँ आते देख सबके जीवन में मानों नवप्राण कौ संचार है गयौ ......अति आनन्द सबके मन में छाय गयौ .....सब जोर जोर तै नाम लैकै बोलवे लगे .......कन्हैया कन्हैया ....लेकिन जे कहा है ...कन्हैया जल तै बाहर जब आयौ ....तौ सब चकित है गये ...क्यों कि कालिय नाग के फन पे सवार है कै कन्हैया बाहर आयौ हो और मात्र सवार है कै ही नही ...नाचते भए ...नृत्य की भाव भंगिमा के साथ । कन्हैया आय गयौ ....कन्हैया आय गयौ .....सब बोल रहे हैं ......मैया यशोदा तै सबने कही ....मैया ! देख तेरौ लाला । मैया ने देखी ...नाचतौ भयौ बाकौ लाला आय रह्यो है ...लेकिन कालिय नाग के ऊपर है जे तौ । सोई मैया चिल्लाई ....लाला ! जल्दी आजा ...जल्दी ...नही तौ कालिय नाग खाय जाएगौ ....कन्हैया ने अपनी मैया की बात सुनी और मुस्कुराके जोर तै बोले ...मैया ! नही खायेगौ ....मेरौ चेला बन गयौ है । जे कहतौ भयौ कन्हैया मेरे माहूँ देख रो ...तौ मैंने हूँ कही ...चेला मूड़वे गयौ तू या हृद में ? कन्हैया बोलो ....देख मधुमंगल ! अब जे मेरी हर बात मानेगौ ....जे कहतौ भयौ कन्हैया नाग के ऊपर तै थल में कूदयो ....फिर संकेत में कन्हैया ने कही .....जाओ ......और सबके सामने कन्हैया कूँ प्रणाम करतौ भयौ वो तौ यमुना कूँ छोड़ के ही चलो गयौ ........ अब मैया अपने लाला कूँ हृदय तै लगाय , बहुत रोईं । कन्हैया बृजराज बाबा तै हूँ मिले ...बाबा ने समझायौ ....आज के बाद नाग सर्पन तै उलझनौं नही है ....लाला ! शास्त्र कहें हैं ....नाग आदि कौ विश्वास नही करनौं चहिए ......कन्हैया सिर झुका के सुनते रहे । रोहिणी माता बहुत रोईं और बोलीं ....आज कै बाद ऐसौ मत करियौ लाला ! तोकूँ कछु है जातौ तौ या बृज के सभी प्राणी मर जाते .........कन्हैया सबकी सुन रहे हैं । अब तौ हम सखान की बारी ....कन्हैया हमारे पास आयौ और सबते गले मिलवे लग्यो ........काहे कूँ गयौ तू कालीदह में ! रोतौ भयौ श्रीदामा पूछ रह्यो है .....तेरे गेंद के काजे ...कन्हैया ने श्रीदामा के अश्रु पोंछते भए कही । नाँय चहिए मोकूँ गेंद ....श्रीदामा अबहूँ रोय रह्यो है । कन्हैया ने श्रीदामा कूँ अपने हृदय तै लगाय लियौ ....अब नही जायगौ तू कहीं । कन्हैया ने श्रीदामा तै कही .....तौ तू भी मोतै गेंद नही माँगेगौ । नही मागूंगौ ...श्रीदामा हाथ जोड़तौ भयौ बोलो ....तभी मोकूँ हाँसी सूझी ...तौ मैंने एक रस्सी लई ....और कन्हैया के ऊपर ....लाला ! बच देख साँप है ....कन्हैया के ऊपर जैसे ही रस्सी गिरी ....कन्हैया चिल्लाए ....मैया बचा साँप । मैया दौड़ी ...बाबा दौड़े ...सब गोप गोपी भागीं ....लेकिन मैं हंसतौ भयौ बोलो ...”रस्सी है”......लेकिन कन्हैया अभी भी काँप रह्यो है । मैंने कन्हैया तै पूछी ...चौं रे ! तोकूँ वहाँ कालिय नाग तै लड़वे में डर नही लग्यो ....यहाँ एक रस्सी तै साँप कह दई तौ डर गयौ ....कन्हैया बोलो ....मधुमंगल ! वहाँ मैं भगवान हो ....लेकिन यहाँ मैं तुम्हारौ लाला हूँ ....तुम्हारौ सखा हूँ ....जो मेरे प्रति जो भाव रखे है मैं बाके भाव की पूर्ति करूँ हूँ । जे बात सुनके मैंने तुरन्त अपने कन्हैया प्यारे कूँ हृदय तै लगाय लियौ हो । क्रमशः Hari sharan
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