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Rama Devi Sahu

122 days ago

सनातन धर्म में वैशाख माह की पूर्णिमा का दिन बेहद पवित्र माना गया है. मान्यतानुसार, इसी शुभ तिथि पर भगवान विष्णु ने कूर्म यानी कछुए का अवतार लिया था. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल कूर्म जयंती 1 मई 2026 को मनाई जाएगी. शास्त्रों के अनुसार, कूर्म अवतार भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से दूसरा है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने कछुए का अवतार लेकर धरती को बचाया था. कच्छप अवतार के दौरान भगवान विष्णु ने कछुए रूप में प्रकट होकर अपनी पीठ पर पूरी पृथ्वी के भार को संतुलित कर असुरों से बचाया था. ऐसे मे आइए जानते हैं, इस साल कूर्म जयंती के लिए शुभ मुहूर्त क्या है, भगवान विष्णु को कछुए का अवतार क्यों लेना पड़ा और इसका क्या महत्व है। #कूर्म_जयंती_2026_तिथि_और_शुभ_मुहूर्त: वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस वर्ष कूर्म जयंती 01 मई 2026 को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ- 30 अप्रैल 2026, रात्रि 09:12 बजे से होगा। पूर्णिमा तिथि का समापन- 01 मई 2026, रात्रि 10:52 बजे होगा। पूजन के लिए शुभ मुहूर्त- 04:36 पी एम से 07:10 पी एम तक #कूर्म_जयंती_की_पूजा_विधि: सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। उसके बाद घर के मंदिर को अच्छे से साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करें। फिर एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु जी की तस्वीर स्थापित करें। सबसे पहले भगवान कूर्म को तिलक लगाएं और फिर दीपक जलाएं। इसके बाद विष्णु जी को अबीर, गुलाल, फूल, चावल, आदि चीजें एक-एक करके अर्पित करें। फिर विष्णु जी के मंत्रों और नामों का जाप करें और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। अंत में विष्णु जी की आरती करें और पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे। #कछुए_के_प्रतीक_का_अर्थ: भगवान विष्णु का कछुआ अवतार हमें जीवन में मजबूती और सुरक्षा का संदेश देता है. कछुए की पीठ बहुत शक्तिशाली और कठोर होती है, जिसे शास्त्रों में ‘आधार’ और ‘रक्षा’ का प्रतीक माना गया है. कूर्म जयंती के दिन कछुए के इसी स्वरूप की पूजा करने से घर की नींव मजबूत होती है और परिवार पर आने वाले बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं. जैसे कछुए ने अपनी पीठ पर पूरे पर्वत को थाम लिया था, वैसे ही भगवान का यह रूप हमारे जीवन की परेशानियों को अपने ऊपर ले लेता है. यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि कठिन समय में धैर्य रखने से ही सुख और शांति की प्राप्ति होती है। #जब_देवराज_इंद्र_को_मिला_शाप: पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महर्षि दुर्वासा देवराज इंद्र की सभा में पहुंचे. वैभव के अहंकार में डूबे इंद्र ने ऋषि का उचित सम्मान नहीं किया और न ही उन्हें प्रणाम किया. अपने इस अपमान से क्रोधित होकर महर्षि दुर्वासा ने इंद्र सहित समस्त देवताओं को शक्ति और ऐश्वर्य विहीन होने का शाप दे दिया। शाप के प्रभाव से देवताओं का तेज, बल और धन लुप्त हो गया. स्वर्ग की रौनक खत्म हो गई और देवता कमजोर पड़ने लगे. घबराकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे और अपनी रक्षा की गुहार लगाई. तब श्री हरि ने उन्हें असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने का सुझाव दिया. ताकि, लुप्त हुई श्री लक्ष्मी और अमृत को फिर से प्राप्त किया जा सके। #कुर्मा_जयंती_का_महत्व_आध्यात्मिक_और_दार्शनिक_दोनों_ही_दृष्टियों_से_है: 1. #धर्म की विजय — यह दिन इस बात का जश्न मनाता है कि कैसे दैवीय हस्तक्षेप ब्रह्मांड के संतुलन के खतरे में पड़ने पर ब्रह्मांडीय व्यवस्था को बहाल करता है। 2. #भगवान विष्णु के प्रति भक्ति - ऐसा माना जाता है कि कूर्म जयंती को पूरी निष्ठा से मनाने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे भक्त को सुरक्षा, समृद्धि और मुक्ति मिलती है। 3. #बाधाओं का निवारण — जिस प्रकार कूर्म ने पर्वत को सहारा दिया था, उसी प्रकार इस दिन पूजा करने से भक्तों को जीवन के सबसे भारी बोझों को दूर करने में मदद मिलती है। 4. #आध्यात्मिक पुण्य (पुण्य) - कूर्म जयंती पर उपवास और पूजा करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है और कहा जाता है कि इससे पिछले पाप धुल जाते हैं। 5. #सृष्टि के प्रति कृतज्ञता — यह उन दिव्य शक्तियों को स्वीकार करने का दिन है जो समस्त सृष्टि को धारण और पोषित करती हैं।

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