
Rama Devi Sahu
40 days ago
माँ लक्ष्मी ने क्रोध में तोड़ा प्रभु जगन्नाथ का रथ पुरी की पावन धरती पर, गूँजा उत्सव का गान, रथयात्रा में निकले प्रभु, संग बलभद्र, सुभद्रा महान। भक्तों का सागर उमड़ पड़ा, जय-जयकार अपार, पर श्रीमंदिर में बैठी लक्ष्मी, करती रहीं इंतज़ार। बोलीं— "प्रभु, बिना बताए चले गए, क्या मेरा प्रेम इतना छोटा रह गया?" आँखों में मान, हृदय में पीड़ा, बन गया मौन ही उनका सहारा। हेरा पंचमी का शुभ अवसर आया, माँ लक्ष्मी ने स्वर्णिम श्रृंगार सजाया। लाल बनारसी, स्वर्ण आभूषण, मुख पर तेज, नेत्रों में अग्नि का स्पंदन। सेविकाओं संग पहुँची गुंडिचा द्वार, मन में उमड़ रहा था प्रेम और तकरार। प्रभु मुस्काए, हाथ बढ़ाया, पर मानिनी लक्ष्मी ने मुख फेर लिया। बोलीं— "नाथ! मुझे भूलकर चले गए, क्या एक बार भी स्मरण न किया? जिस महल को मैंने प्रेम से सजाया, उसे छोड़ आपने किसे अपनाया?" प्रभु रहे शांत, मुस्कान वही, मानो प्रेम की भाषा कह रही। पर मान का बादल घना था आज, रानी के हृदय में उठ रहा था राज। क्रोध नहीं था केवल रोष, उसमें छिपा था प्रेम का जोश। उन्होंने उठाई एक सशक्त लकड़ी, और नंदीघोष के रथ पर दे मारी। रथ का एक भाग टूट गया, देखकर जनसमूह भी चुप रह गया। न यह था द्वेष, न कोई युद्ध, यह तो प्रेम का अनोखा शुद्ध स्वरूप। प्रभु ने देखा, फिर मंद हँसे, मानो कह रहे हों— "मैं सब समझे।" क्योंकि जहाँ सच्चा प्रेम होता है, वहाँ रूठना भी एक उत्सव होता है। लक्ष्मी लौट चलीं अपने धाम, पर मन में था वही प्रियतम का नाम। प्रभु भी जानते थे यह व्यवहार, प्रेम का है यह मधुर श्रृंगार। कुछ ही दिनों में लौटेंगे नाथ, सजेगा फिर से श्रीमंदिर का पथ। रूठी रानी भी हँस पड़ेंगी, प्रेम की कलियाँ फिर खिलेंगी। हेरा पंचमी का यह संदेश महान, प्रेम में मान भी है भगवान। जहाँ विश्वास और अपनापन रहता है, वहीं हर रूठना भी मिलन कहता है। जय माँ लक्ष्मी। जय प्रभु श्रीजगन्नाथ।

Comments (8)

Rohit Patel
Jul 22, 2026
जी... धन्यवाद जी... अभी तो यही बात पर कायम है जी 🙂🙏💞💕💞

Rama Devi Sahu
Jul 21, 2026
मनुष्य संसार के रिश्तों और अपेक्षाओं में उलझकर दुःखी होता है, क्योंकि यहाँ अधिकांश संबंध स्वार्थ से जुड़े होते हैं। सच्चा और अटल सहारा केवल भगवान् हैं। इसलिए अपने तन को मानव सेवा में और मन को भगवान् की भक्ति में लगाओ—यही जीवन का सच्चा मार्ग है। जब मनुष्य अपनी अपेक्षाएँ संसार से हटाकर भगवान् पर भरोसा करता है और निःस्वार्थ भाव से सेवा व भक्ति करता है, तब निराशा, मोह और दुःख स्वतः दूर हो जाते हैं। ऐसे जीवन में अंततः केवल शांति, संतोष और परम आनंद की प्राप्ति होती है।

Rama Devi Sahu
Jul 21, 2026
मनुष्य संसार के रिश्तों और अपेक्षाओं में उलझकर दुःखी होता है, क्योंकि यहाँ अधिकांश संबंध स्वार्थ से जुड़े होते हैं। सच्चा और अटल सहारा केवल भगवान् हैं। इसलिए अपने तन को मानव सेवा में और मन को भगवान् की भक्ति में लगाओ—यही जीवन का सच्चा मार्ग है। जब मनुष्य अपनी अपेक्षाएँ संसार से हटाकर भगवान् पर भरोसा करता है और निःस्वार्थ भाव से सेवा व भक्ति करता है, तब निराशा, मोह और दुःख स्वतः दूर हो जाते हैं। ऐसे जीवन में अंततः केवल शांति, संतोष और परम आनंद की प्राप्ति होती है।

Rama Devi Sahu
Jul 21, 2026
मनुष्य संसार के रिश्तों और अपेक्षाओं में उलझकर दुःखी होता है, क्योंकि यहाँ अधिकांश संबंध स्वार्थ से जुड़े होते हैं। सच्चा और अटल सहारा केवल भगवान् हैं। इसलिए अपने तन को मानव सेवा में और मन को भगवान् की भक्ति में लगाओ—यही जीवन का सच्चा मार्ग है। जब मनुष्य अपनी अपेक्षाएँ संसार से हटाकर भगवान् पर भरोसा करता है और निःस्वार्थ भाव से सेवा व भक्ति करता है, तब निराशा, मोह और दुःख स्वतः दूर हो जाते हैं। ऐसे जीवन में अंततः केवल शांति, संतोष और परम आनंद की प्राप्ति होती है।

My Mandir good by
Jul 21, 2026
bhut sundar radhe radhe 👏

R k jangid phulera Jaipur
Jul 21, 2026
जय जगन्नाथ महाप्रभु की 🙏

Rohit Patel
Jul 21, 2026
जी रमा जी... स्त्रियों से प्रेम करना चाहिए या नहीं यह मसला सता रहा है हमे.. कहीं कुछ चूक हो जाए तो... पुरी गड़बड़...😄

Rohit Patel
Jul 21, 2026
जी...प्रेम मे तोड़ - फोड़ 😄🙏💕💞💕
