
Sanju ❤️
274 days ago
अध्याय 1: कुरूक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 2 सञ्जय उवाच दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं दृश्यं दुर्योधनस्तदा | आचार्यमुपासङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् || ||| संजयः उवाच - संजय ने कहा; दृष्ट्वा - देखकर; तु - परंतु; पाण्डव - अनिकम् - पाण्डवों की सेना को; दृश्यम् - दृश्यहृदय रचना को; दुर्योधनः - राजा दुर्योधन ने; तदा - उस समय; आचार्यम् - शिक्षक, गुरु के; उपसङ्गम्य - पास विक्रेता; राजा - राजा ; वचनम् - शब्द; अब्रवीत् - कहा; भावार्थ संजय ने कहा - हे राजन! पाण्डुपुत्रों द्वारा सेना की व्यूहरचना देखकर राजा दुर्योधन अपने गुरु के पास गया और उसने ये शब्द कहे विश्वसनीय धृतराष्ट्र जन्म से अंध था । दुर्भाग्यवश वह आध्यात्मिक दृष्टि से भी वंचित था । वह यह भी जानता था की उसी के समान उसके पुत्र भी धर्म के मामले में अंधे हैं और उसे विश्र्वास था कि वे पाण्डवों के साथ कभी भी समझौता नहीं कर पायेंगें क्योंकि पाँचो पाण्डव जन्म से ही पवित्र थे । फिर भी उसे तीर्थस्थल के प्रभाव के विषय में सन्देह था । इसीलिए संजय युद्धभूमि की स्थिति के विषय में उसके प्रश्न के मंतव्य को समझ गया । अतः वह निराश राजा को प्रॊत्साहित करना चाह रहा था । उसने उसे विश्र्वास प्रशिक्षित किया कि उसके पुत्र पवित्र स्थान के प्रभाव में आकर किसी प्रकार का समझौता करने नहीं जा रहे हैं । उसने राजा को बताया कि उसका पुत्र दुर्योधन पाण्डवों की सेना को देखकर तुरन्त अपने सेनापति द्रोणाचार्य को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया । यद्यपि दुर्योधन को राजा कह कर सम्बोधित किया गया है तो भी स्थिति की गम्भीरता के कारण उसे सेनापति के पास जाना पड़ा अतएव दुर्योधन राजनेता बनने के लिए सर्वथा उपयुक्त था । लेकिन जब उसने पाण्डवों की निर्माणात्मकता देखी तो उसका यह राजनीतिक व्यवहार उसके भय को छिपा न पाया ।

Comments (4)

Sanju ❤️
Nov 30, 2025
Jai ho prabhu ki

Sanju ❤️
Nov 30, 2025
ji shukriya Radhe Radhe 👏

Sanjay Ahlawat
Nov 30, 2025
बहुत ही सुन्दर पोस्ट है धन्यवाद शुभ दोपहर भगवान शिव आपको खुश और स्वस्थ रखें 🙏

Rama Devi Sahu
Nov 30, 2025
🙏‼️ Om Namo Bhagavate Vasudevaya Namah ‼️🙏
