
Rama Devi Sahu
190 days ago
जो पास है, वह सब प्रभु की कृपा, जो दिख रहा है, वह सब उस की लीला, सब प्राणियों में उसी की सत्ता; मैं-मेरा कहीं नहीं। ऐसे भाव से प्रेम स्वतः बढ़ेगा। जीवन रूपी रथ का सारथी है बुद्धि! अर्जुन बन जाओ, सारथि श्रीकृष्ण को बना लो; जीवन संग्राम में विजय निश्चित है। जब आप अहंकार में जीते हैं तो स्वयं को बहुत बौना, बहुत छोटा बना लेते हैं। अहंकार से ऊपर उठ कर देखो-सब अपने हैं और आप सब के! सामर्थ्य यहीं मिली है, यहीं रहनी है। प्रभु के भाव से किया गया सदुपयोग यहाँ सम्मान बढ़ायेगा, आगे साथ निभायेगा। जब तक भीतर चिन्ता-चिन्तन एवं वृत्तियों - विकारों से भरे रहोगे, तब - तक खाली ही हो। अन्दर से खाली हो जाओ; प्रेम, शान्ति, करुणा, आनन्द और कृपा से भर जाओगे। माता-पिता बड़े-बुजूर्गो का सम्मान अत्यावश्यक है। उनकी प्रसन्न्ता का कारण बनो, परेशानी का नहीं। 🙏🌺जय जय श्री राधे कृष्णा🌺🙏
Comments (2)

Bajra Singh Chouhan
Apr 4, 2026
इसको यह नहीं मालूम हम पुरखा रहते हैं जो अपने माता-पिता के जन्म लेते हैं वह भी हमारे अंदर से ही जन्म लेंगे ऐसे से गांडू के मालूम नहीं है इससे पूछो बरगद का पेड़ क्या होता है ऐसे झंडू बाम पंडितों से सावधान बरगद का पेड़ का इसलिए पूजा किया जाता है जो अकाल मृत्यु प्राप्त किए रहते हैं वही सब उसमें रहते हैं

Bajra Singh Chouhan
Apr 4, 2026
ऐसे ऐसे चुटिया पंडित लोग को कहां से खोज कर लाती है 😁
