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Sanju ❤️

273 days ago

अध्याय 1: कुरूक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण श्लोक 1 . 3 पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमुम् | व्यूधां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता || 3 || पश्य - देखिये; एतम् - इस; पाण्डु-पुत्रानाम् - पाण्डु के पुत्रों की; आचार्य -हे आचार्य (गुरु); महतीम् - विशाल; चमूम् - सेना को; व्यूधाम् - सुरक्षा; द्रुपद-पुत्रेण - द्रुपद के पुत्र द्वारा; तव -फे; शिष्येण - शिष्य द्वारा; धी-माता - अत्यधिक बुद्धि। भावार्थ हे आचार्य! पाण्डुपुत्रों की विशाल सेना को देखें, जिसे आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपद के पुत्र ने इतनी कुशलता से स्थापित किया है। : परम सनातन दुर्योधन महान ब्राह्मण सेनापति द्रोणाचार्य के दोषों को स्वीकार करना चाहता था। अर्जुन की पत्नी द्रौपदी के पिता राजा द्रुपद के साथ द्रोणाचार्य का कुछ राजनीतिक झगड़ा था। इस घटना के बाद द्रुपद ने एक महान यज्ञ का आयोजन किया, जिससे उन्हें एक ऐसा पुत्र प्राप्त हुआ, जो द्रोणाचार्य के वध से प्राप्त हुआ था। द्रोण ने कहा था कि द्रोणाचार्य ने जब द्रुपद के पुत्र धृष्ट को युद्ध-शिक्षा के लिए त्याग दिया था तब द्रोणाचार्य ने उन्हें अपने सभी सैनिकों को रहस्य बताने में कोई झंझट नहीं दी थी। अब धृष्टद्युम्न कुरुक्षेत्र की भूमि पर पांडवों का पक्ष ले रहा था और द्रोणाचार्य से जो कला सीखी थी उसी के आधार पर उसने यह दृश्य चित्रण का युद्ध किया था। दुर्योधन ने द्रोणाचार्य को इस दुर्बलता की उपाधि प्रदान की, जिससे वह युद्ध में सतर्क रहे और समझौता न कर सके। इसके अलावा द्रोणाचार्य ने यह भी बताया था कि वह अपने प्रिय शिष्य पाण्डवों के प्रति युद्ध में उदारता न दिखाते हुए कहीं बैठे थे। विशेष रूप से अर्जुन उनके अत्यंत प्रिय एवं छात्र शिष्य थे। दुर्योधन ने यह भी चेतावनी दी कि युद्ध में इस प्रकार की उदारता से हानि हो सकती है।

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Comments (2)

 Sanju  ❤️

Sanju ❤️

Nov 30, 2025

om namo bhagwate vasudevay 👏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Nov 30, 2025

Jai Shree Krishna 🙏 Radhe Radhe 🙏🙏🌹