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Rama Devi Sahu

10 days ago

🌹🚩*मोक्ष के कारक 🚩🌹* *************************** *जब मन, मनुष्य शरीर में उत्पन्न काम, द्वेष और मोह त्याग कर, मन को परमात्मा में लगा देता है, उसी समय वह परम ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है। जब साधक सुनने योग्य और देखने योग्य पदार्थों तथा संपूर्ण प्राणियों में समान भाव वाला हो जाता है एवं सुख-दुख, भय-अभय, प्रेम-क्रोध नामक द्वन्द्वों से रहित हो जाता है, उस समय वह ब्रह्मभाव को प्राप्त हो जाता है। उस समय मनुष्य निंदा- स्तुति, सुख-दुख, शीतोष्ण, अर्थ-अनर्थ, प्रिय-अप्रिय, जीवन-मरण में सम भाव रखता है। जब मनुष्य की ऐसी स्थिति हो जाती है, तब वह ब्रह्मभाव को प्राप्त हो जाता है।* *जैसे कछुआ अपने अंगों को बाहर निकाल कर पुनः कवच के अंदर कर लेता है, उसी प्रकार संन्यासी अपनी इंद्रियों को बाह्य जगत में, विचरण न करा कर अपने हृदय में परमात्मा का दर्शन करता है। जैसे दीपक के प्रकाश में सभी वस्तुएँ दिखाई देती हैं, उसी प्रकार अज्ञान, अंधकार से ढके हुए हुए प्राणियों को विशुद्ध, ज्ञान रूपी दीपक से परमात्मा का साक्षात्कार होता है।* *इस ज्ञान के प्रभाव से ही हम ऐसे योगी की स्थिति यथार्थ रूप से जान रहे हैं। ऐसे योगी का प्रभाव, उस की गति और उसका ऐश्वर्य- ये सभी बातें दूसरे योगियों से अधिक हैं। बाल स्वभाव के कारण अथवा मोक्ष न मिलने के काल्पनिक भय से मनुष्य को ज्ञान प्राप्त हो जाने के बाद भी मोक्ष की प्राप्ति न होने का भय बना रहता है। जब दूसरे के द्वारा यह संशय दूर कर दिया जाता है, तब उस साधक को विशुद्ध निश्चय हो जाता और वह बंधन मुक्त होकर परम ब्रह्म को प्राप्त कर लेता है।* *यदि हम को ज्ञान प्राप्त हो चुका है। हमारी बुद्धि विषयों से परे है, विषय भोगों की इच्छा का सर्वथा अभाव है, परंतु विशुद्ध निश्चय के बिना कोई परमात्मा को नहीं प्राप्त करता है। आप सुख-दुख में कोई अंतर नहीं मानते। अपने मन में लोभ नहीं है। सांसारिक वस्तुओं को प्राप्त करने के विषय में हमारे मन में कोई उत्सुकता नहीं है और किसी वस्तु के प्रति हमारे मन में कुछ भी राग नहीं है। हम बंधु- बांधवों में आसक्ति नहीं रखते। हम भयदायक प्राणियों से भयभीत नहीं होते। हम सम-लोष्टाश्म-कांचन योगी हैं। हम मनीषी पुरुष भी सबको आनंदप्रद परम पद में स्थित मानते हैं। इस जगत में जन्म लेने का जो फल है और मोक्ष का जो स्वरूप है, उसमें हम स्थित हैं।* *मानव समाज में यह बड़ा मिथक है कि मोक्ष केवल घर बार छोड़ कर सब चीजों का त्याग करके ही प्राप्त किया जा सकता है। सत्य यह है कि मोक्ष के लिए मन के भाव की आवश्यकता है यदि हमारा मन परिवर्तित हो सन्यास रूप हो चुका है तो घर बार त्यागने की कोई आवश्यकता ही नहीं है। ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर वाली स्थिति मन में लाकर गृहस्थी बद्ध होकर भी मोक्ष की प्राप्ति की जा सकती है। यह मन का वह भाव है जहाँ बिना माँगे ही सब कुछ, सारा वैभव प्राप्त होता है। बस वह भाव पैदा करो और कर लो दुनिया मुट्ठी में।* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

Comments (18)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 12, 2026

fir bhi.... Sach me Aap ki Sare Comment mujhe bahut achhi lagati hai... 2din ho, Wi fi Conection band hai, or internet slow chal rahi hai... Mari Prabhu Shri Jagannath or Radha Rani ki Kripa se Aap Hamesha Khush raho yahi hai meri Prarthana..❤️🌹 meri pyari pyari Choti Behan ❤️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 12, 2026

ॐ ऐं श्रीं ब्रह्मचारिण्यै नमः देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। जय माता दी 🪔🚩🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 12, 2026

🔱🙏 महादेव सभी भक्तों पर अपनी कृपा और आशीर्वाद बनाए रखें। हर दुःख दूर हो, जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आए। 🌺 दिल से बोलिए— हर हर महादेव! 🕉️🔱

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 12, 2026

"अयि गिरि नन्दिनी नन्दितमेदिनी, विश्व विनोदिनी नन्दिनुते" - "जय जय हे महिषासुर मर्दिनी, रम्यकपर्दिनी, शैलसुते" जय माता दी 🌺🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 12, 2026

ॐ ऐं श्रीं ब्रह्मचारिण्यै नमः देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।। जय माता दी 🪔🚩🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 12, 2026

राधा-कृष्ण का प्रेम ही जीवन का सबसे सुंदर एहसास है। 🙏🌸 हृदय में राधा रानी का प्रेम और श्रीकृष्ण की भक्ति सदा बनी रहे। 🦚❤️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 12, 2026

राधा-कृष्ण का प्रेम ही जीवन का सबसे सुंदर एहसास है। 🙏🌸 हृदय में राधा रानी का प्रेम और श्रीकृष्ण की भक्ति सदा बनी रहे। 🦚❤️

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Oct 12, 2026

Abhi Thik ho gaya...ji

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Oct 12, 2026

जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ रात्रि 🙏

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Oct 12, 2026

दीदी एक दूसरे के सहयोग से ही परिवार चलता है ☺️ और my mandir एक परिवार की तरह ही तो है। इसीलिये अपनी छोटी बहन को धन्यवाद कहना की जरूरत नहीं है 🤗 शुभ संध्या वंदन मेरी प्यारी दी 🙏🌹☺️