
Rama Devi Sahu
158 days ago
नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के सबसे भयंकर और शक्तिशाली स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है— 'काल' का अर्थ है समय या मृत्यु और 'रात्रि' का अर्थ है रात। अर्थात् जो काल का भी विनाश करने वाली हैं। इन्हें 'शुभंकरी' भी कहा जाता है क्योंकि इनका रूप भले ही विकराल हो, पर ये सदैव शुभ फल देने वाली हैं। माँ कालरात्रि की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज नामक राक्षसों ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया, तब देवताओं की रक्षा के लिए माँ दुर्गा ने अपने तेज से इस स्वरूप को प्रकट किया। * रक्तबीज का संकट: रक्तबीज को यह वरदान प्राप्त था कि उसके शरीर से रक्त की एक भी बूंद जहाँ गिरेगी, वहाँ वैसा ही एक और शक्तिशाली राक्षस पैदा हो जाएगा। युद्ध के मैदान में देवी ने जितने असुर मारे, उससे कहीं ज्यादा रक्तबीज पैदा होते गए। * माँ का विकराल रूप: तब माँ दुर्गा ने क्रोध में आकर माँ कालरात्रि को उत्पन्न किया। माँ कालरात्रि ने अपने भयानक मुख को फैला लिया और रक्तबीज का वध करते समय उसके रक्त को जमीन पर गिरने से पहले ही पीना शुरू कर दिया। * असुरों का अंत: इस प्रकार रक्तबीज की शक्ति क्षीण हो गई और माँ ने उसका और शुंभ-निशुंभ का अंत किया। उनके इस प्रलयंकारी रूप को देखकर ब्रह्मांड के समस्त पाप और नकारात्मक शक्तियाँ थर-थर कांपने लगीं। देवी का स्वरूप माँ कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत डरावना और दिव्य है। * उनका शरीर अंधकार के समान काला है और केश बिखरे हुए हैं। * उनके गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है। * उनके तीन नेत्र हैं जो ब्रह्मांड की तरह गोल हैं और जिनसे अग्नि की वर्षा होती है। * वे गधे (गर्दभ) की सवारी करती हैं। * उनके चार हाथ हैं—एक हाथ में खड्ग (तलवार), दूसरे में लोहे का कांटा, तीसरा हाथ अभयमुद्रा में और चौथा वरदमुद्रा में है। महत्व और फल माँ कालरात्रि की पूजा से भक्त के जीवन से भय, रोग और शत्रु का नाश होता है। इन्हें 'शुभंकरी' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनकी शरण में आने वाले भक्त को कभी किसी प्रकार का डर नहीं सताता। तंत्र-मंत्र की बाधाओं को दूर करने के लिए इनकी पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। पूजा मंत्र: एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ आज के विशेष विवरण * भोग: माँ कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाना अत्यंत प्रिय है। इससे मानसिक शांति मिलती है और दरिद्रता दूर होती है। * रंग: आज के दिन ग्रे या नीला रंग पहनना शुभ माना जाता है।

Comments (6)

Rama Devi Sahu
Mar 25, 2026
Ji Namaste 🙏 Shubha Budhvaar Aap ke liye Shubha Ho 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Mar 25, 2026
Shubha Budhvaar Aap ke liye Shubha Ho 🌹 Aap ka Odia language ka Comment Bahut hi Achhi lagi...🌹 Dhanyawad 🌹 Maa ki Aasirbad se Aap ka Jeevan Sukad or Mangalkari Ho 🌹 Shubh Ratri Jii 🌹❤️🌹

Rama Devi Sahu
Mar 25, 2026
🙏🌺 Jai Mata Di 🌺🙏 Subha Ratri Jii 🌹🌹

R k jangid phulera Jaipur
Mar 25, 2026
जय माता दी माता रानी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे 🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Mar 25, 2026
ବୁଧବାର ସକାଳେ ନମସ୍ତେ 🙏ସେ ଉଲଗ୍ନ ଥିଲେ ଏବଂ ଏକ ଗଧ ଉପରେ ବସିଥିଲେ, ଯେଉଁଥିରେ ଗୋଟିଏ ବେଣୀ ଏବଂ କାନ ମନ୍ତ୍ର ଜପରେ ପୂର୍ଣ୍ଣ ଥିଲା। ତାଙ୍କର ଲମ୍ବା ଓଠ ଏବଂ କାନଫୁଲ ଥିଲା ଏବଂ ତାଙ୍କ ଶରୀର ତେଲରେ ଆଚ୍ଛାଦିତ ଥିଲା। ତାଙ୍କ ବାମ ପାଦ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଲାଲ ଲତା ଏବଂ କଣ୍ଟା ଦ୍ୱାରା ସଜ୍ଜିତ। ବର୍ଦ୍ଧନଙ୍କ ମସ୍ତକରେ କଳା ପତାକା ହେଉଛି ମୃତ୍ୟୁର ରାତି, ଏବଂ ଏହା ଭୟଙ୍କର। ଆଦିଶକ୍ତି ମା ଭଗବତୀ ମା'ଙ୍କ ସପ୍ତମ ରୂପ।

poonam sharma poonam
Mar 25, 2026
jay mata di 🙏🏻🪷☘️🌺
