
बद्रीप्रसादअसाटी
308 days ago
🚩🌞🚩🌞🚩🌞🚩🌞🚩🌞 *🚩🌞27 अक्टूबर 2025🚩🌞* *🕉️🌞छठ पूजा का तीसरा दिन भावनात्मक एवं मनोभावन होता है।🕉️🌞* 🚩🌞🕉️🚩🌞🕉️🚩🌞🕉️🚩 *🕉️🌞छठ पूजा का तीसरा दिन सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। इसे “संध्या अर्घ्य” का दिन कहा जाता है, और यह पूरे छठ पर्व का सबसे भावनात्मक और मनोभावन क्षण होता है।* *🕉️🌞आइए इसे विस्तार से समझते हैं---* *🕉️🌞तीसरा दिन — संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त की उपासना)* *🕉️🌞दिन का महत्व* *🕉️🌞छठ पूजा का तीसरा दिन व्रत के सबसे मुख्य चरणों में से एक है। इस दिन व्रती (मुख्य रूप से महिलाएं, पर पुरुष भी करते हैं) अस्ताचलगामी सूर्य, अर्थात् डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।* *🕉️🌞यह सूर्यदेव की उपासना का वह क्षण होता है जब दिन समाप्त होता है, पर भक्ति चरम पर होती है।* *🕉️🌞संध्या अर्घ्य का आध्यात्मिक अर्थ* *🕉️🌞सनातन परंपरा में सूर्य न केवल प्रकाश और ऊर्जा का प्रतीक हैं, बल्कि जीवन, सत्य और आत्मबोध के भी प्रतीक हैं। जब सूर्य अस्त होता है, तब मनुष्य को यह स्मरण कराया जाता है कि —“हर अंत में भी एक नई शुरुआत छिपी होती है।”* *🕉️🌞इसलिए संध्या अर्घ्य कृतज्ञता का प्रतीक है —* *🕉️🌞व्रती सूर्य देव को नमन करते हैं कि उन्होंने सम्पूर्ण जीवन को ऊर्जा और प्रकाश दिया।* *🕉️🌞जल अर्पण करते समय यह भावना रहती है कि “हमारे जीवन में अंधकार कभी स्थायी न हो।”* *🕉️🌞तीसरे दिन की प्रमुख क्रियाएं और परंपराएं* *🕉️🌞1. दिनभर उपवास* *🕉️🌞व्रती दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं — न जल, न अन्न ग्रहण करती हैं।* *🕉️🌞शरीर से अधिक यह मन, विचार और आत्मा की परीक्षा होती है।* *🕉️🌞2. अर्घ्य की तैयारी* *🕉️🌞शाम के समय परिवार और समाज मिलकर नदी, तालाब या घाट पर जाते हैं।* *🕉️🌞वहाँ बाँस की टोकरी (डाला) में पूजा सामग्री रखी जाती है —* *🕉️🌞ठेकुआ, फल (केला, नारियल, गन्ना, सिंघाड़ा, नींबू, नारंगी आदि), दीपक, और जल से भरे कलश।* *🕉️🌞3. सूर्यास्त का पूजन* *🕉️🌞जब सूर्य पश्चिम दिशा में ढलने लगता है, तब व्रती खड़े होकर नदी या जलाशय में अर्घ्य देती हैं।* *🕉️🌞वे दोनों हाथों से जल उठाकर सूर्य की किरणों को अर्पित करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु तथा लोककल्याण की कामना करती हैं।* *🕉️🌞4. सामूहिक गायन और भजन* *🕉️🌞इस समय घाटों पर भक्तजन “कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए” जैसे पारंपरिक भजनों का गायन करते हैं।* *🕉️🌞यह वातावरण अत्यंत भक्ति, शुद्धता और आनंद से भर जाता है।* *🕉️🌞धार्मिक दृष्टिकोण से अर्थ* *🕉️🌞छठ पूजा का यह चरण हमें सिखाता है —* *🕉️🌞कृतज्ञता का मूल्य: डूबते सूर्य को अर्घ्य देना यह स्वीकारना है कि जीवन में हर क्षण की अपनी महत्ता है, चाहे वह प्रारंभ हो या अंत।* *🕉️🌞संतुलन की साधना: अस्त होते सूर्य को नमस्कार करना हमें यह सिखाता है कि उन्नति के साथ विनम्रता भी आवश्यक है।* *🕉️🌞परिवार और समाज का एकत्व: इस दिन पूरा समुदाय साथ आकर पूजा करता है — यह सामूहिक संस्कार की शक्ति का उदाहरण है।* *🕉️🌞चौथे दिन की भूमिका की तैयारी* *🕉️🌞तीसरे दिन की शाम को संध्या अर्घ्य के बाद व्रती अगले दिन प्रातः उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी करते हैं, जिसे “भोरवा अर्घ्य” कहा जाता है। इसके साथ ही व्रत का समापन होता है।* *🕉️🌞छठ पूजा का तीसरा दिन — “अंधकार के क्षण में भी प्रकाश की आराधना करने की कला” सिखाता है।* *🕉️🌞यह दिन भक्तों के लिए त्याग, आस्था और कृतज्ञता का संगम है, जहाँ मनुष्य सूर्य की उपासना के माध्यम से प्रकृति, जीवन और ईश्वर के प्रति अपनी अटूट निष्ठा प्रकट करता है।* 🚩🕉️🌞🚩🕉️🌞🚩🚩🕉️🌞

Comments (1)

बद्रीप्रसादअसाटी
Oct 27, 2025
छट मैया सबकी मनोकामना पूरी करे
