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Saumya Sharma

76 days ago

जय श्री लक्ष्मीनारायण जी 🙏 मेरे सभी भाई बहनों को शुभ मंगलकामनाओं के साथ सुप्रभात वंदन 🙏 🌹☺️ एक भक्त था प्रह्लाद का पौत्र, असुर सम्राट बलि। बलि शक्तिशाली था, पराक्रमी था और दानवीर भी था। उसकी कीर्ति तीनों लोकों में फैली हुई थी। जो भी उसके द्वार पर आता, खाली हाथ नहीं लौटता था। धीरे-धीरे उसकी शक्ति इतनी बढ़ गई कि उसने स्वर्ग तक पर अधिकार कर लिया। देवता भयभीत हो गए। लेकिन बलि को अपनी शक्ति पर गर्व होने लगा। वह सोचने लगा कि अब उसे कोई नहीं रोक सकता। एक दिन उसने अपने गुरु शुक्राचार्य से कहा, "गुरुदेव, अब केवल एक अंतिम यज्ञ शेष है। उसके बाद तीनों लोकों पर मेरा अधिकार स्थायी हो जाएगा।" उसी समय भगवान विष्णु ने सोचा कि अब समय आ गया है। भक्त को दंड नहीं, बल्कि शिक्षा देने का समय। उन्होंने वामन नाम के एक छोटे ब्राह्मण बालक का रूप धारण किया। सिर पर जटा, हाथ में छाता और दूसरे हाथ में एक छोटा सा कमंडल। वह सीधे बलि के यज्ञ में पहुंचे। जैसे ही बलि ने उस तेजस्वी बालक को देखा, वह स्वयं उठकर उसके स्वागत के लिए आया। "ब्राह्मण कुमार, आज मेरे यज्ञ में आपका स्वागत है। मांगिए, क्या चाहिए? वामन मुस्कुराए और बोले, "राजन, मुझे कुछ नहीं चाहिए। बस तीन पग भूमि दे दीजिए, जिसे मैं अपने छोटे-छोटे पैरों से नाप सकूं।" बलि हंस पड़ा। उसने कहा, "तीन पग भूमि? मैं तो तुम्हें पूरा राज्य दे सकता हूं।" लेकिन वामन ने शांत स्वर में कहा, "जिसे जितनी आवश्यकता हो, उसे उतना ही लेना चाहिए। मुझे केवल तीन पग भूमि चाहिए।" तभी शुक्राचार्य ने अपनी दिव्य दृष्टि से पहचान लिया कि यह स्वयं भगवान विष्णु हैं। वे तुरंत बोले, "राजन, रुक जाओ। यह भगवान हैं। यह तुमसे सब कुछ ले लेंगे।" लेकिन बलि अपने वचन से पीछे हटने वाला नहीं था। उसने कहा, "यदि स्वयं भगवान मेरे द्वार पर याचक बनकर आए हैं, तो इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा? मैं अपना वचन नहीं तोड़ूंगा।" अब संकल्प लेने का समय आया। जैसे ही बलि ने जल पात्र उठाया, शुक्राचार्य ने अपनी माया से सूक्ष्म रूप धारण किया और पात्र की नली में जाकर बैठ गए ताकि जल बाहर ही न निकल सके। बलि हैरान था कि जल क्यों नहीं निकल रहा। लेकिन वामन सब समझ चुके थे। उन्होंने पास पड़ी कुश घास का एक नुकीला तिनका उठाया और पात्र की नली में डाल दिया। तिनका सीधा शुक्राचार्य की आंख में जा लगा। वे पीड़ा से चिल्लाते हुए बाहर निकल आए और उनकी एक आंख हमेशा के लिए नष्ट हो गई। अब संकल्प पूरा हो गया। अगले ही क्षण वह छोटा सा ब्राह्मण विराट रूप धारण करने लगा। वह अब वामन नहीं, त्रिविक्रम थे। पहला कदम उठा तो पूरी पृथ्वी नप गई। दूसरा कदम उठा तो स्वर्ग और ब्रह्मलोक तक समा गए। फिर भगवान ने पूछा, "बलि, अब तीसरा कदम कहां रखूं?" उसी क्षण बलि का अहंकार टूट गया। वह घुटनों के बल बैठ गया और बोला, "प्रभु, अब मेरे पास कुछ नहीं बचा। केवल मेरा सिर बचा है। तीसरा कदम मेरे मस्तक पर रख दीजिए।" भगवान मुस्कुराए और अपना तीसरा चरण बलि के सिर पर रख दिया। उसी क्षण बलि का अहंकार समाप्त हो गया और उसकी भक्ति पूर्ण हो गई। भगवान विष्णु उससे अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा, "बलि, तुमने अपना सब कुछ मुझे समर्पित कर दिया। मांगो, क्या चाहते हो?" बलि की आंखों में आंसू थे। उसने कहा, "प्रभु, मुझे राज्य नहीं चाहिए, स्वर्ग नहीं चाहिए। बस इतना वर दीजिए कि मैं प्रतिदिन आपके दर्शन कर सकूं।" भगवान बोले, "तथास्तु। मैं स्वयं सुतल लोक में तुम्हारे साथ रहूंगा।" और स्वयं भगवान विष्णु सुतल लोक में जाकर बलि के द्वारपाल बन गए। उधर वैकुंठ में माता लक्ष्मी व्याकुल थीं। तभी देवर्षि नारद ने उन्हें उपाय बताया। उन्होंने कहा, "माते,आपको बलि के पास देवी बनकर नहीं, बहन बनकर जाना होगा।" माता लक्ष्मी ने साधारण स्त्री का रूप धारण किया और सुतल लोक पहुंच गईं। उस दिन रक्षाबंधन का पवित्र पर्व था। उन्होंने बलि की कलाई पर राखी बांधी। बलि भावुक हो उठा। उसने कहा, "बहन, आज से मैं तुम्हारा भाई हूं। मांगो, क्या चाहती हो?" माता लक्ष्मी की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा, "भैया, मुझे मेरा पति वापस चाहिए।" उसने हाथ जोड़कर कहा, "प्रभु, एक भक्त आपको अपने पास रखना चाहता है, लेकिन एक भाई अपनी बहन को दुखी नहीं देख सकता। आप वैकुंठ लौट जाइए।" भगवान विष्णु ने प्रेम से बलि को गले लगा लिया। उस दिन उन्होंने कहा, "बलि, तुमने साबित कर दिया कि सच्ची भक्ति केवल पाने में नहीं, त्याग करने में भी होती है। जय श्रीहरि। 🙏✨

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Comments (66)

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Jun 15, 2026

आपको सपरिवार सोमवती अमावस्या की हार्दिक शुभ कामनाऐ 🙏

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Jun 15, 2026

जय श्री राधे कृष्ण भैया जी 🙏 शुभ मंगलकामनाओं के साथ सुप्रभात वंदन 🙏बड़े भाई आप कैसे हो

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Jun 15, 2026

राधे राधे जी 🙏 शुभ प्रभात वंदन मेरी बहन

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Jun 14, 2026

jai shree Radhey Krishna bhaiya ji 🙏 Good night 🙏 Always stay blessed with happiness 🙏🌹☺️

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Jun 14, 2026

राधे राधे जी 🙏 शुभ रात्री वंदन मेरी बहन

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Jun 14, 2026

जय श्री राधे कृष्ण भैया जी 🙏 शुभ मंगलकामनाओं के साथ शुभ संध्या वंदन बड़े भाई 🙏🌹☺️

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Jun 14, 2026

राधे राधे जी 🙏 शुभ दोपहर वंदन मेरी बहन

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Jun 13, 2026

जय श्री राधे कृष्ण भैया जी 🙏 शुभ रात्रि विश्राम बड़े भाई 🙏🌹☺️

Suresh Kumar

Suresh Kumar

Jun 13, 2026

राधे राधे जी 🙏 शुभ रात्री वंदन मेरी बहन

Saumya Sharma

Saumya Sharma

Jun 13, 2026

शुभ मंगलकामनाओं के साथ शुभ दोपहर वंदन मेरी प्यारी दी 🙏 ठाकुर जी की कृपा से आप सदैव स्वस्थ और खुशहाल रहें 🙏 यही प्रार्थना है 🙏🌹☺️