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|| श्रीहरि: || परम श्रद्धेय सेठजी श्रीजयदयालजी गोयन्दका ---------------------------------------- भगवान् की लगन लगावें ( पोस्ट 8 अन्तिम ) ---------------------------------------- गत पोस्ट से आगे ...... आज तुलसीदासजी नहीं हैं, किन्तु उनका उपदेश, उनकी जीवनी उपलब्ध है, उससे हजारों मनुष्य मुक्त हो रहे हैं | वे चले गये और संसार में एक वस्तु ‘श्रीरामचरितमानस’ छोड़ गये, जिससे सारी दुनिया का कल्याण हो रहा है | हम लोग भी अपना जीवन तुलसीदासजी की तरह बनावें | हमारा जीवन, हमारी शिक्षा तुलसीदासजी के अनुसार होगी तो लोगों का कल्याण होता रहेगा, अन्यथा हमारा जीवन पशुओं के समान है | जिन पुरुषों में न कोई विद्या है, न दान है, न ज्ञान है, न तप है, न धर्म है, वे इस मृत्यु लोक में भार रूप हैं, मनुष्य की आकृति में पशु ही हैं | यह सब सुनकर आप लोगों में जोश आना चाहिये | एक समय दुर्योधन आदि राजा युधिष्ठिर को वन में मारने के लिये गये | भीष्म आदि ने मना किया कि जिस वन में युधिष्ठिर है वहाँ मत जाना, फिर भी वहीँ गये | चित्रसेन गन्धर्व सेना लेकर दुर्योधन से युध्द करने आया, घोर युध्द हुआ | चित्रसेन ने दुर्योधन को बाँध लिया | उसके मंत्री ने राजा युधिष्ठिर को सूचना दी | युधिष्ठिर ने भीम, अर्जुन को भेजकर दुर्योधन को छुड्वाया | दुर्योधन लज्जित हो गया | युधिष्ठिर ने देखा कि इसे संकोच हो रहा है, कहा – तुम्हारे भाई तुम्हारी राह देखते होंगे | दुर्योधन चुपचाप चला गया | दुर्योधन जैसे पापी पर भी एक बार तो प्रभाव पड़ा | महाराज युधिष्ठिर के बर्ताव की ओर देखो | अपने साथ बुराई करने वाले के साथ भी भलाई का व्यवहार करते हैं | हमें यह बात सीखने की है | जब पाण्डव लोग वन में गये, तब कुन्ती रोटी रही, गान्धारी तथा धृतराष्ट्र ने कैसा व्यवहार किया | उसकी खबर भी नहीं ली कि जीती है या मर गयी | वही कुन्ती जब धृतराष्ट्र, गान्धारी वन को जाने लगे, तब सेवा करने के लिये साथ गयी | राजा युधिष्ठिर तथा माता कुन्ती का जीवन आदर्श है | हम लोगों को भी इनकी तरह आदर्श जीवन बनाना चाहिये | नारायण ! नारायण !! नारायण !!! गीताप्रेस,- गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक *प्रतिकूलता में प्रसन्नता* पुस्तक कोड १९०८ से |

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Comments (1)

बद्रीप्रसादअसाटी

बद्रीप्रसादअसाटी

Nov 8, 2025

जय जय श्री राम जी गाते हनुमान जी