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*❤️शान्ताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।* *#भावार्थ :-* जिनकी आकृति अतिशय शांत है, जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो ‍देवताओं के भी ईश्वर और संपूर्ण जगत के आधार हैं, जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं, नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है, अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, जो संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं, जो जन्म-मरण रूप भय का नाश करने वाले हैं, ऐसे लक्ष्मीपति, कमलनेत्र भगवान-श्रीविष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ। ॐ॥ *#ॐ_नमो_भगवते_वासुदेवाय🙏* *#कमलनयन_दर्शन -:* *चिता चिंता समाप्रोक्ता ,बिंदुमात्रं विशेषता।सजीवं दहते चिंता ,निर्जीवं दहते चिता।।* *#भावार्थः-* चिता और चिन्ता, ये दोनों एक समान कही गयी हैं, किन्तु उसमें भी चिन्ता में एक बिंदु की विशेषता है; क्योंकि चिता तो मृत व्यक्ति को ही जलाती है, किन्तु व्यर्थ चिन्ता जीवित व्यक्ति को मार देती है। अतः सहज रहें, प्रसन्न रहें, स्थिर रहें..। *#जय_जय_सियाराम💥🙏* *#आपका_गुरुवार_मंगलमय_हो* *💮#सुप्रभात💮*

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