
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
2 days ago
शुभ प्रभात जी ये बात बहुत ही गहरी है जी। चलिए इसे विस्तार से समझते हैं - *सच्चे रिश्ते उस घड़ी की सुइयों के समान होते हैं, जो कुछ ही पल के लिए मिलते हैं, परंतु सदा एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।* इसका अर्थ देखिए: घड़ी में 3 सुइयाँ होती हैं - घंटा, मिनट और सेकंड। फोटो में जैसे 7 बजकर 58 मिनट हो रहा है। *1. कुछ पल के लिए मिलना:* दिन में ये तीनों सुइयाँ सिर्फ कुछ ही बार एक साथ एक बिंदु पर मिलती हैं, जैसे 12 बजे। बाकी समय एक आगे-पीछे चलती रहती हैं। वैसे ही सच्चे रिश्तों में जरूरी नहीं कि आप हर वक्त साथ रहो, रोज मिलो, रोज बात करो। *2. सदा जुड़े रहना:* भले ही सुइयाँ अलग-अलग दिखती हैं, लेकिन अंदर से वो एक ही मशीन से, एक ही धुरी से जुड़ी होती हैं। एक रुके तो घड़ी ही रुक जाए। वैसे ही सच्चा रिश्ता - भाई-भाई का, पति-पत्नी का, सच्चे मित्र का - दूर होकर भी मन से जुड़ा रहता है। *3. अपनी गति, एक लक्ष्य:* हर सुई की अपनी रफ्तार है। छोटी सुई धीरे चलती है, बड़ी तेज। पर लक्ष्य सबका एक ही है - समय को सही दिखाना, घड़ी को चलाए रखना। परिवार में भी हर सदस्य का अपना काम, अपनी सोच है, पर मंजिल एक ही है - घर की खुशहाली। *सीख क्या है?* आजकल हम सोचते हैं रिश्ता तभी मजबूत है जब रोज फोन हो, रोज मिलना हो। नहीं। सच्चा रिश्ता घड़ी की सुइयों जैसा होता है - मिलना कम हो सकता है, पर जुड़ाव कभी खत्म नहीं होता। भरोसा अटूट रहता है। इसीलिए कहते हैं - रिश्तों को समय दीजिए, दूरी से मत डरिए, धुरी मजबूत रखिए। आपका दिन मंगलमय हो 🙏

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