
Rama Devi Sahu
162 days ago
🌸 माँ चंद्रघंटा की कथा (नवरात्रि का तीसरा दिन) 🌸 माँ दुर्गा का तीसरा स्वरूप माँ चंद्रघंटा है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र शोभित होता है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनका रूप अति दिव्य और शांत है, लेकिन जब दुष्टों का संहार करना होता है तो इनका क्रोध अत्यंत भयानक हो जाता है। कथा के अनुसार— माँ पार्वती का विवाह भगवान शिव से हुआ। विवाह के समय उन्होंने चंद्रमा के आकार का अर्धचंद्र अपने मस्तक पर धारण किया और अपने गले में घंटे के स्वरूप का आभूषण सजाया। तभी से उन्हें "चंद्रघंटा" के नाम से जाना जाने लगा। माँ चंद्रघंटा का स्वरूप भक्तों को भय से मुक्त करता है और उनके हृदय में शांति और साहस भर देता है। ऐसा कहा जाता है कि माँ के घंटे की ध्वनि से दुष्टों, राक्षसों और असुरों का नाश होता है। माँ अपने भक्तों के सभी संकटों और बाधाओं का निवारण करती हैं। ✨ पूजन का महत्व ✨ जो साधक नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की उपासना करते हैं, उन्हें धैर्य, शक्ति, सौभाग्य और शांति प्राप्त होती है। इनके पूजन से शत्रुओं का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। जय माँ चंद्रघंटा आप सभी को हर मनोकामना पूरी करें जय माता दी 🙏 🔱 🙏

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