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Rama Devi Sahu

64 days ago

🙏 दंडमहोत्सव 🙏 *आज श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी पाद जी के दंडमहोत्सव पर विशेष* श्रील रघुनाथ दास जी को खबर मिली कि श्रीनित्यानंद प्रभु सप्तग्राम के अंतर्गत पानिहाटि आयें हैं। उनके साथ रामदास, गदाधर, पुरंदर पण्डित आदि पार्षद हैं। महाप्रभु ने उन्हें घर – घर जाकर प्रेम बांटने का आशीर्वाद दिया है। नित्यानंद जिसे एक बार देख लेते उनमे अश्रु , कंप ,पुलक , हुंकार आदि सात्विक गुण प्रकट होने लगते। श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी जी को लगा इस बार अवश्य कृपा होगी तथा वे पानीहाटी श्रीनित्यानंद के पास पहुँच गये। श्रीनित्यानंद कीर्तन नर्तन के पश्चात वट तीर के नीचे चबूतरे पर बैठे थे। श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी जी ने आते ही नित्यानंद को साष्टांग किया। अन्य भक्तगण तो श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी जी को जानते ही थे। उन्होंने नित्यानंद को बताया की ये तो यहाँ के मालिक हैं। श्रीनित्यानंद ने उठकर श्री रघुनाथ दास गोस्वामी जी को उठाया। उनके सर पे चरण कमल रखकर फिर उन्हें उठाकर हृदय से लगा लिया। फिर प्रेम से श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी जी को देखते हुए बोले , *”चोर, इतने दिनों बाद पकड़ में आया। तुझे दंड मिलेगा।”* श्री रघुनाथदास गोस्वामी जी हैरान होकर निताई चाँद की तरफ देखने लगे। परन्तु निताई का भाव था गौरांग महाप्रभु भगवत तत्त्व हैं, उन तक पहुँचने के लिए गुरु तत्त्व आवश्यक है एवं श्री रघुनाथदास गोस्वामी जी ने दो बार गौरांग महाप्रभु से सीधे ही कृपा प्राप्त करने का प्रयास किया था। दंड के लिए श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी जी तैयार थे। श्रीनित्यानंद ने उन्हें दंड स्वरुप सभी भक्तों के लिए दही चिवडा खिलाने का आदेश दिया। श्रीरघुनाथदास गोस्वामी जी को दंड सुनकर ख़ुशी हुई। धन और सेवकों की उन्हें कमी नही थी। अल्प समय में सारा इंतज़ाम हो गया। इतना सारा चिवडा , केला, गुड़, दूध, दही मंगवाया गया। केला और गुड़ को मिलाकर मिश्रित द्रव्य बनाया गया। फिर चिवड़े के दो हिस्से किये गये। एक हिस्से में चिवड़े और दही तथा गुड़ केले का मिश्रण डाला गया। दूसरे हिस्से में चिवडों में दूध तथा गुड़ केले का मिश्रण डाला गया। सभी भक्तों को एक एक दोना दही चिवडा व एक दोना दूध चिवडा दिया गया। फिर श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी जी ने वट वृक्ष के नीचे आसन बिछाकर दो दो दोने श्री गौरांग महाप्रभु एवं श्री नित्यानंद प्रभु के लिए रख दिए। निताई चाँद ने ध्यानस्त होकर श्री गौरहरि को पुकारा एवं प्रेम पुकार सुनकर गौरांग महाप्रभु वहां आये। उनके आते ही श्रीनित्यानन्द खड़े हो गये एवं महाप्रभु के साथ श्रीनिताई चाँद सभी लोगों के बीच गये। सभी के दोने में से एक एक कण उठाकर श्री गौरांग महाप्रभु को खिलाने लगे। अंत में श्रीनित्यानंद गौरांग महाप्रभु के साथ चबूतरे पर आकर बैठ गये। श्री गौरांग महाप्रभु वहां प्रकट हो गये थे, यह दृश्य सभी को नही दिखा। जिन्होंने प्रेम चक्षुओं से उन्हें देखा, उन्हें ही श्रीमहाप्रभु दिखे। नित्यानंद ने अपना एवं श्री गौरांग का अवशिष्ट प्रसाद श्री रघुनाथ दास गोस्वामीपाद को दिया। दंड महोत्सव समाप्त हुआ। आज भी जाह्नवी तट पर उसी वट वृक्ष के नीचे ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी आज के दिन हमारे गुरुदेव के सर्वस्व प्राणधन बड़ेबाबा महाशय के परम प्रिय श्रीपाद रामदास बाबाजी महाराज अपने गुरुदेव के संग सपरिकर उसी वट बृक्ष के नींचे माँ जाह्नवी घाट पर एकत्र होकर श्री रघुनाथ गोस्वामी पाद का दंड महोत्सव मनाते हैं। राधे राधे

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Comments (4)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 28, 2026

Aarogya ki Devta Shri Surya Bhagwan ki Aasirbad Aap pr Hamesha Banaye Rakhe 🌹 Aap ka Din Subha Mangal Ho 🌹 Om Ghrini Surya Namah 🌞🙏🌺

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Jun 28, 2026

Panihati Chuda (Poha) Dahi Mahotsava ki Hardik Shubhkamnaye 🙏 Shubha Dopahar, Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹🌹

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 27, 2026

शुभ रविवार शुभ प्रभात २८/०६/२६ !! ॐ श्री सूर्य देवाय नमः !! जय जय सूर्यदेव सूर्यदेव रविवार सुबह की हार्दिक शुभकामनाएं प्रकाश के देवता सूर्य देवजी की कृपा आप और आपके परिवार पर सदा बनी रहे आपका दिन शुभ एवं मंगलमय रहे

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Jun 27, 2026

ଶୁଭ ସନ୍ଧ୍ୟା ଏବଂ ରାତି ରାଧା ରାଣୀ ତାଙ୍କର ହୋଶ ହରାଉଛି। ଅପେକ୍ଷା ଅସହ୍ୟ। କେହି ଜଣେ ରାତ୍ରୀଯାତ୍ରୀକୁ ଶୀଘ୍ର ରାଧା ପାଖକୁ ଆସିବାକୁ କୁହ।