
Rama Devi Sahu
13 hours ago
समस्त पापों का नाश करने वाली 'पापांकुशा एकादशी': जानिए महिमा, कथा और व्रत का विधान 22 अक्टूबर गुरुवार 2026 पापांकुशा एकादशी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कहा जाता है। इस एकादशी का महान महत्त्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। इस पवित्र तिथि पर भगवान पद्मनाभ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पापरूपी हाथी को इस व्रत के पुण्यरूपी अंकुश से वेधने के कारण ही इसका नाम पापांकुशा एकादशी पड़ा है। इस दिन मौन रहकर भगवद स्मरण तथा उपवास का विधान है। इस प्रकार भगवान की अराधना करने से मन शुद्ध होता है तथा व्यक्ति में सद्गुणों का समावेश होता है। इस एकादशी व्रत के नियमों का पालन दशमी तिथि की रात्रि से ही आरंभ कर देना चाहिए तथा इस दौरान ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातःकाल नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की शेषशय्या पर विराजित प्रतिमा के समक्ष बैठकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन यथासंभव उपवास रखना चाहिए और अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। यदि यह संभव न हो, तो व्रती केवल एक समय फलाहार कर सकता है। इसके पश्चात विधि-विधान के साथ भगवान पद्मनाभ की पूजा करनी चाहिए। यदि व्रत करने वाला व्यक्ति स्वयं पूजन करने में असमर्थ हो, तो यह पूजन किसी योग्य ब्राह्मण के माध्यम से भी करवाया जा सकता है। भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए। स्नान के उपरांत उनके चरणामृत को व्रती को अपने तथा परिवार के सभी सदस्यों के अंगों पर छिड़कना चाहिए और उस चरणामृत का पान करना चाहिए। इसके पश्चात भगवान को गंध, पुष्प, धूप, दीपक और नैवेद्य आदि पूजन सामग्री अर्पित करनी चाहिए। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना तथा इसकी कथा का श्रवण करना चाहिए। रात्रि के समय भगवान विष्णु की मूर्ति के समीप ही शयन करना चाहिए और अगले दिन यानी द्वादशी के दिन वेदपाठी ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। इस प्रकार पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से दिव्य फलों की प्राप्ति होती है। व्रत कथा प्राचीन काल में विंध्य पर्वत पर क्रोधन नामक एक महाक्रूर बहेलिया रहता था। उसने अपनी संपूर्ण आयु हिंसा, लूटपाट, मद्यपान तथा मिथ्या भाषण आदि कुकर्मों में व्यतीत कर दी थी। जब उसके जीवन का अंतिम समय आया, तब यमराज ने अपने दूतों को आदेश दिया कि वे क्रोधन को अपने साथ ले आएं। यमदूतों ने क्रोधन को सचेत कर दिया कि कल ही उसका अंतिम दिन है। मृत्यु के भय से भयभीत होकर वह बहेलिया महर्षि अंगिरा की शरण में उनके आश्रम जा पहुंचा। महर्षि ने उसके अनुनय-विनय से प्रसन्न होकर उस पर कृपा की और उसे अगले ही दिन आने वाली आश्विन शुक्ल एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने का उपदेश दिया। इस प्रकार उस महापातकी व्याध ने पापांकुशा एकादशी का व्रत और पूजन कर भगवान की कृपा से विष्णु लोक को प्रस्थान किया। उधर यमदूत इस अद्भुत चमत्कार को देखकर हक्के-बक्के रह गए और बिना क्रोधन के ही यमलोक वापस लौट आए। दूसरी कथा एक अन्य प्रसंग के अनुसार, एक बार महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी का क्या महत्त्व है, इस अवसर पर किसकी पूजा होती है तथा इस व्रत से क्या लाभ प्राप्त होता है? युधिष्ठिर की मधुर वाणी को सुनकर गुणातीत भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि आश्विन शुक्ल एकादशी पापांकुशा के नाम से विख्यात है। इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह पापों का निरोध करती है अर्थात उनसे हमारी रक्षा करती है। इस एकादशी के व्रत के प्रभाव से मनुष्य को अर्थ, मोक्ष और काम इन तीनों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति इस व्रत का अनुष्ठान करता है, उसके समस्त संचित पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन व्रती को प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए तथा उनके निमित्त व्रत और पूजन करना चाहिए। व्रती को रात्रि के समय जागरण करना चाहिए। जो लोग पूर्ण भक्ति भाव से इस व्रत का पालन करते हैं, उनका जीवन सुखमय होता है और वे सांसारिक भोगों में आसक्त नहीं होते हैं। श्रीकृष्ण आगे कहते हैं कि जो भक्त पापांकुशा एकादशी का व्रत रखते हैं, वे कमल के पुष्प के समान पवित्र होते हैं, जो संसार रूपी माया के भंवर में रहकर भी पापों से अछूते रहते हैं। कलियुग में जो भक्त इस व्रत का निष्ठापूर्वक पालन करते हैं, उन्हें वही पुण्य फल प्राप्त होता है, जो

Comments (3)

प्रेम कुमार
Oct 22, 2026
🌹🌹 ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नमः 🌹🌹 पापांकुशा एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🌹 शुभ प्रभात वंदन बहना 🌹🌹

Shah 🩷
Oct 22, 2026
ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः🪷 सुप्रभात🌄 एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं🌹

Savita om namah shivay 🙏🌹
Oct 22, 2026
"हरि हर की कृपा रहे आप पर अपार, सदा सुखी रहे आपका जीवन और संसार। पापाकुंशा एकादशी की आपको सादर शुभकामनाएँ पापा!"
