
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
199 days ago
एक गुरु ने दुखी शिष्य से एक मुट्ठी नमक पानी के गिलास में डालने को कहा। शिष्य ने पिया और कहा, "बहुत खारा है।" फिर गुरु ने उतना ही नमक एक विशाल झील में डलवाया। अब पानी का स्वाद पूछा, तो शिष्य बोला, "मीठा है।" गुरु बोले, "जीवन के दुख नमक की तरह हैं; अपनी सोच का दायरा बढ़ाओ, दुख छोटा हो जाएगा।" *शिक्षाः* हृदय जितना बड़ा होगा, जीवन की मुश्किलें उतनी ही कम प्रभाव डालेंगी।

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