
Rama Devi Sahu
339 days ago
एक बार नारद मुनि ने सोचा कि संसार में सबसे बड़ा भक्त कौन है। वे बहुत ही अहंकार में आ गए और अपने मन में बोले – “मैं तो हर समय भगवान का नाम लेता हूँ, उनके गुणगान करता हूँ। निश्चय ही मुझसे बड़ा भक्त इस संसार में कोई नहीं है।” नारद जी यह सोचकर सीधे वैकुण्ठ लोक पहुँच गए और भगवान विष्णु से बोले – “प्रभु! बताइए, इस संसार में सबसे बड़ा भक्त कौन है? क्या आप मानते हैं कि मैं ही आपका सबसे श्रेष्ठ भक्त हूँ?” भगवान विष्णु मुस्कराए और बोले – “नारद, तुम्हारा प्रेम मुझे प्रिय है, परंतु मैं तुम्हें एक स्थान दिखाता हूँ जहाँ मेरा सच्चा भक्त रहता है।” भगवान नारद को लेकर पृथ्वी पर एक साधारण किसान के घर पहुँचे। किसान सुबह उठते ही ‘नारायण-नारायण’ कहता, खेतों में काम करता और रात को फिर सोने से पहले भगवान को स्मरण करता। नारद जी ने यह देखा तो आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने कहा – “प्रभु! यह किसान तो दिन में केवल दो बार ही आपका नाम लेता है, और मैं तो हर समय जप करता हूँ। फिर यह मुझसे बड़ा भक्त कैसे हुआ?” भगवान विष्णु मुस्कराए और बोले – “नारद, एक काम करो। इस घड़े को अपने सिर पर रखकर पूरे दिन घुमो और ध्यान रहे कि यह पानी की एक बूँद भी न गिरे।” नारद जी ने घड़ा उठा लिया और पूरे दिन घूमते रहे। शाम को लौटकर वे बहुत थक गए। भगवान ने पूछा – “नारद, आज कितनी बार मेरा नाम लिया?” नारद जी लज्जित होकर बोले – “प्रभु, घड़े का ध्यान रखने में इतना व्यस्त रहा कि आपका नाम तो एक बार भी न ले पाया।” तब भगवान विष्णु ने समझाया – “देखो नारद, यह किसान दिनभर परिश्रम करता है, परिवार की देखभाल करता है, फिर भी दिन में दो बार पूरे भाव से मेरा नाम लेता है। यही उसकी सच्ची भक्ति है। केवल जप करना ही नहीं, बल्कि हृदय की गहराई से प्रेम करना ही सच्ची भक्ति है।” नारद जी का अहंकार चूर हो गया और उन्होंने भगवान से क्षमा माँगी। शिक्षा: सच्ची भक्ति केवल नाम जप में नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक कार्य में भगवान को याद करने और प्रेम से उनका स्मरण करने में है।

Comments (2)

Radhe Radhe
Sep 26, 2025
🚩💐 शुभ शुक्रवार शुभ संध्या वंदन जीवनजी।। नारद मुनि और भगवान विष्णु जी की कथा ््््््ॐ वेरी वेरी नाइस पोस्ट जी।। विस्तृत, जानकारी संपूर्ण , अति मनमोहक।। ््््््ॐ बहुत ही अच्छी पोस्ट जी 🔹--लाइन कोट्स--🔹//धन्यवाद जी बहन जी//💐🚩
