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Rama Devi Sahu

168 days ago

Aapka post k liye subject *पत्थरों का सीना* लगातार पाँच साल के भयंकर सूखे ने पूरे गाँव को वीरान कर दिया था। खेत बंजर हो गए थे और सभी लोग अपना घर-बार छोड़कर शहर जा रहे थे। लेकिन 65 साल के गंगाराम ने गाँव छोड़ने से मना कर दिया। उन्होंने एक भारी कुदाल उठाई और गाँव के बाहर एक सूखी पहाड़ी को खोदना शुरु कर दिया। जाते हुए लोग उन पर हँसते, "बुड्डा पागल हो गया है, यहाँ से पानी नहीं, सिर्फ धूल उड़ेगी!" लेकिन गंगाराम बिना कुछ सुने, चिलचिलाती धूप में रोज़ खुदाई करते रहे। उनके हाथों में छाले पड़ गए और छाले फूटकर खून रिसने लगा, पर कुदाल नहीं रुकी। पूरे ग्यारह महीने की खामोश और दर्दनाक तपस्या के बाद, एक दिन कुदाल एक बड़ी चट्टान पर लगी और से मीठे पानी का एक तेज़ फव्वारा फूट पड़ा ! पानी देखकर लौटते हुए गाँव वालों की आँखें फटी रह गई। गंगाराम ने मुस्कुराते हुए दुनिया को बता दिया वि अगर पसीना बहाने की ज़िद हो, तो पत्थरों का सीन? चीरकर भी ज़िंदगी निकाली जा सकती है।

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Comments (2)

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 15, 2026

Ji Namaste 🙏 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏🌹🌹

Umesh  Sharma

Umesh Sharma

Mar 15, 2026

Radhe Radhe 🌹