
Rama Devi Sahu
105 days ago
यह बिल्कुल सच है कि महाभारत के युद्ध में धर्म की स्थापना के लिए श्रीकृष्ण ने बर्बरीक का शीश बड़ी कूटनीति और चतुराई (चालाकी) से दान में मांग लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने एक ब्राह्मण भेष धारण किया और बर्बरीक के पास गए। उन्होंने बर्बरीक को रोककर कहा कि तुम केवल तीन बाण से युद्ध में सम्मिलित होने आए हो। इसपर बर्बरीक ने जवाब दिया कि मेरा एक बाण भी शत्रु सेना को परास्त करने के लिए काफी है। शत्रुओं का संहार करने के बाद मेरा बाण वापस तूणीर में ही आ जाएगा। यह वीडियो भी देखें तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें चुनौती देते हुए एक पीपल के पेड़ की ओर इशारा करते हुए कहा कि तुम अपने बाण से इस वृक्ष के सभी पत्तों को भेदकर दिखाओ। बर्बरीक ने चुनौती स्वीकार करते हुए एक बाण निकाला और पेड़ के पत्तों की ओर चलाया। बाण ने पलभर में ही पेड़ के सभी पत्तों को भेद दिया। इसलिए मांगा शीश का दान लेकिन इस दौरान भगवान ने एक पत्ता अपने पैर के नीचे छुपा लिया था, इसलिए बाण उनके पैर के इर्द-गिर्द चक्कर लगाने लगा। तब बर्बरीक ने कहा कि आप अपने पैर को हटा लीजिए। तब कृष्ण जी ने उससे पूछा कि तुम युद्ध में किसका साथ दोगे। इसपर बर्बरीक ने अपनी मां को दिए हुए वचन को दोहराया और कहा कि मैं हारे का सहारा बनूंगा। उस समय युद्ध भूमि में स्थिति बिल्कुल उलट थी, पांडव, कौरवों की सेना पर भारी पड़ रहे थे। तब भगवान श्रीकृष्ण को लगा कि कौरवों को हारते हुए देखकर बर्बरीक कहीं उनका साथ न दे दे। तब भगवान श्रीकृष्ण ने दक्षिणा के रूप में बर्बरीक जी से उनके शीश का दान मांगा, ताकि वह युद्ध में भाग न ले सकें। भगवान कृष्ण ने दिया ये आशीर्वाद बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना सिर श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया। बर्बरीक जी से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें आशीष दिया कि कलियुग में उन्हें पूजनीय स्थान और प्रसिद्धि मिलेगी। साथ ही यह भी कहा कि तुम्हें मेरे नाम से पूजा जाएगा। इसलिए आज बर्बरीक जी खाटू श्याम के रूप में जाने जाते हैं।
Comments (2)

Rama Devi Sahu
May 17, 2026
🌹🌹 Jai Shree Shyam 🌹🌹

सविता
May 17, 2026
Radhe radhe 🙏🌹
