
Rama Devi Sahu
4 days ago
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* 🌤️ *दिनांक - 03 अक्टूबर 2026* 🌤️ *दिन - शनिवार* 🌤️ *विक्रम संवत 2083 (गुजरात अनुसार 2082)* 🌤️ *शक संवत -1948* 🌤️ *अयन - दक्षिणायन* 🌤️ *ऋतु - शरद ॠतु* 🌤️ *मास - आश्विन (गुजरात-महाराष्ट्र भाद्रपद)* 🌤️ *पक्ष - कृष्ण* 🌤️ *तिथि - सप्तमी सुबह 07:59 तक तत्पश्चात अष्टमी* 🌤️ *नक्षत्र - आर्द्रा 04 अक्टूबर रात्रि 01:29 तक तत्पश्चात पुनर्वसु* 🌤️ *योग - वरीयान शाम 03:21 तक तत्पश्चात परिघ* 🌤️ *राहुकाल - सुबह 09:29 से सुबह 10:58 तक* 🌤️ *सूर्योदय - 06:31* 🌤️ *सूर्यास्त - 06:23* 👉 *दिशाशूल - पूर्व दिशा मे* 🚩 *व्रत पर्व विवरण - अष्टमी का श्राद्ध,महालक्ष्मी व्रत समाप्त* 🚩 *विशेष- सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)* 💥 *चतुर्मास के दिनों में ताँबे व काँसे के पात्रों का उपयोग न करके अन्य धातुओं के पात्रों का उपयोग करना चाहिए।(स्कन्द पुराण)* 💥 *चतुर्मास में पलाश के पत्तों की पत्तल पर भोजन करना पापनाशक है।* 🌷 *पुष्य नक्षत्र योग* 🌷 ➡ *04 अक्टूबर 2026 रविवार को मध्यरात्रि 12:13 से 05 अक्टूबर सूर्योदय तक रविपुष्यामृत योग है ।* 🙏🏻 *१०८ मोती की माला लेकर जो गुरुमंत्र का जप करता है, श्रद्धापूर्वक तो २७ नक्षत्र के देवता उस पर खुश होते हैं और नक्षत्रों में मुख्य है पुष्य नक्षत्र, और पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं देवगुरु ब्रहस्पति | पुष्य नक्षत्र समृद्धि देनेवाला है, सम्पति बढ़ानेवाला है | उस दिन ब्रहस्पति का पूजन करना चाहिये | ब्रहस्पति को तो हमने देखा नहीं तो सद्गुरु को ही देखकर उनका पूजन करें और मन ही मन ये मंत्र बोले –* *ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |...... ॐ ऐं क्लीं ब्रहस्पतये नम : |* 🌷 *कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में* 🌷 🌳 *बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें |* 🌷 *रविपुष्यामृत योग* 🌷 🙏🏻 *‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है |* 🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं | (शिव पुराण, विद्येश्वर संहिताः अध्याय 10)* 🌷 *श्राद्धकर्म* 🌷 🙏🏻 *अगर श्राद्धकर्म करने के लिए आपके पास बिल्कुल भी धन नहीं है तो आपको उधार मांगकर धन लेना चाहिए और श्राद्ध करना चाहिए। अगर आपको कोई उधार नहीं दे रहा तो पितरों के उद्देश्य से पृथ्वी पर भक्ति विनम्र भाव से सात आठ तिलों से जलाञ्जलि ही दे दें। अगर यह भी संभव नहीं तो कहीं से चारा लाकर गौ को खिला दें। और अगर इतना भी संभव नहीं तो अपनी बगल दिखाते हुए सूर्य तथा दिक्पालों से कहें :* 🌷 *"न मेऽस्ति वित्तं न धनं चान्यच्छ्राद्धोपयोग्यं स्वपितॄन्नतोऽस्मि ।* *तृप्यन्तु भत्त्या पितरो मयैतौ कृतौ भुजौ वर्त्मनि मारुतस्य ।।"* ➡ *'मेरे पास श्राद्धकर्म के योग्य न धन-संपति है और न कोई अन्य सामग्री। अत: मै अपने पितरों को प्रणाम करता हूँ। वे मेरी भक्ति से ही तृप्तिलाभ करे। मैंने अपनी दोनों भुजाएं आकाश में उठा रखी हैं ।* 💥 *ऐसा विवरण विष्णुपुराण तृतीयांश, अध्यायः 14 तथा वराहपुराण अध्याय 13 में मिलता है।* *🌞~ हिन्दू पंचांग ~🌞*

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Oct 3, 2026
🙏‼️ Om Shang Shaneischaray Namah ‼️🙏 Suprabhat Ji 🌹🌹

सविता
Oct 3, 2026
भय से मुक्ति: "शनिदेव की वक्र दृष्टि भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती, जिनके हृदय में स्वयं रामभक्त हनुमान वास करते हैं।" जय शनिदेव! जय बजरंगबली!
