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खोकला और उसके प्रभावी उपाय - हळदी के दूध में खारीक मिलाकर पीने से खोकला ठीक होता है। दूध में दो खारीक और हळद उबालकर ठंडा होने पर पीना चाहिए। इससे कफ मोकला होकर बाहर निकलता है और खोकला ठीक होता है। - अदरक और शहद एक साथ लेने से आराम मिलता है और खोकला ठीक होता है। - लसुन प्रकृति से उष्ण है, इसमें एंटीबैक्टेरियल गुण होते हैं। लसुन की कलियां तुप में तले और गरम-गरम खानी चाहिए। इससे गले को शेक लगता है और आराम मिलता है। - काले मिरे, जायफल की पाउडर और शहद एक साथ लेने से जल्दी फायदा होता है। दिन में दो-तीन बार लेना चाहिए। - पिप्पली को कूटकर शहद में मिलाकर चाटने से खोकला ठीक होता है। - खोकला ठीक न हो रहा हो तो नीलगिरी के तेल की कुछ बूंदें नारियल के तेल में मिलाकर छाती पर मालिश करनी चाहिए। इससे कफ मोकला होकर बाहर निकलता है और आराम मिलता है। - ज्येष्ठमध एक उपयोगी औषधि है। खोकले की उबळ आ रही हो तो ज्येष्ठमध की काडी चबाने से ढास आता है और आराम मिलता है। या ज्येष्ठमध और शहद का मिश्रण चाटने से आराम मिलता है। - पुदीना पत्ते और तुलसी खोकला ठीक करने में मददगार हैं। 10-15 पुदीना पत्ते और 15-16 तुलसी पत्ते एक ग्लास पानी में उबालकर आधा करने पर एक छोटा गुळ का टुकड़ा डालकर गरम-गरम पीना चाहिए। इससे कफ मोकला होकर बाहर निकलता है और आराम मिलता है। - खोकला आ रहा हो तो लवंग और शहद एक साथ चाटने से आराम मिलता है। - सर्दी और खोकला हो तो मूठभर कडुनिंब पत्ते धोकर एक चम्मच ओवा मिलाकर बारीक वाटना चाहिए और यह लेप कानशिल पर लगाना चाहिए। संक्रमण दूर होता है। - खोकला ठीक न हो रहा हो तो चार वेलदोडे और तितली सुंठ पाउडर एक साथ शहद में मिलाकर चाटने से आराम मिलता है। - नुसती कोरडी ढास लग रही हो तो दो वेलदोडे तवे पर भूनकर पाउडर बनाकर तुप और शक्कर मिलाकर चाटना चाहिए। - खोकला, कफ, सर्दी पर रोज़ विड्याचे पान दिन में दो बार खाना चाहिए। - खोकले पर सुंठी की पाउडर आधा चम्मच + पिप्पली चूर्ण + बेहडा चूर्ण पाव चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से आराम मिलता है। - खोकला हो तो बडीशेप और खडीसाखर खानी चाहिए। एक चिमूटभर कात की पाउडर गरम पानी में मिलाकर पीना चाहिए। - खोकले में रक्त आ रहा हो तो ओले खोबरे पाव वाटी में पांच-छह मनुके मिलाकर खाना चाहिए। - खोकला आ रहा हो तो चिकणी सुपारी खानी चाहिए। - खोकला ठीक न हो रहा हो तो तुलसी के पत्तों का रस दो चम्मच लेकर उसमें थोडी खडीसाखर मिलाकर पीना चाहिए। दिन में तीन-चार बार पीना चाहिए। तीन दिन तक पीना चाहिए। - कोरडा खोकला हो तो खसखशी की खीर खानी चाहिए। मूठभर खसखस तुप में भूनकर दूध में शिजवाकर गरम-गरम पीना चाहिए। शक्कर आवडीनुसार मिलानी चाहिए। - डांग्या खोकले पर तुरटी कूटकर गरम करनी चाहिए। फिर उसमें पानी मिलाकर बशी धूप में रखनी चाहिए। पानी निकल जाता है और शुद्ध तुरटी शिल्लक रहती है। उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पीना चाहिए। - तिळ का तेल कोमट करके पीना चाहिए। - बकुळी के फूल ओंजळभर + सोनचाफ्य के फूल ओंजळभर + दो तांबे पानी लेकर शक्कर मिलाकर काढा बनाकर दिन में पाव वाटी पीना चाहिए। - अडुळसा पत्ते वाफे पर उकडकर रस काढना चाहिए और थोड़ा गूळ मिलाकर पाव कप रस पीना चाहिए। - एक कप दूध में लसुन की चार कलियां उबालकर पीना चाहिए। - ज्येष्ठ मध + खडीसाखर चबानी चाहिए। - कोरफड के पत्ते भूनकर रस काढना चाहिए। एक चम्मच रस लेकर शहद मिलाकर पीना चाहिए। - भिमसेन कापूर और एक चम्मच शक्कर मिलाकर चाटने से आराम मिलता है। - खोकला हो तो तुलसी के पत्ते ठेचकर गरम करके छाती शेकनी चाहिए।

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