
Rama Devi Sahu
101 days ago
अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में **33 बाती का दीपक** जलाने का अत्यंत विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान दान, पुण्य और दीपदान का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इस महीने में 33 की संख्या का बहुत बड़ा महत्व है, क्योंकि अधिक मास के अधिपति भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं और इस दौरान 33 देवताओं की पूजा की जाती है। इस दीपक से जुड़ी मुख्य बातें और विधि नीचे दी गई हैं: ### 33 बाती का ही महत्व क्यों? अधिक मास के दौरान भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों, 12 आदित्यों, 8 वसुओं, 11 रुद्रों और 2 अश्विनी कुमारों को मिलाकर कुल **33 देवताओं** का पूजन किया जाता है। इसलिए, 33 बत्तियां बनाकर दीपदान करने से इन सभी देवताओं का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। मान्यता है कि इससे जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। ### दीपक तैयार करने की विधि 1. **दीपक का चुनाव:** इसके लिए आप मिट्टी का बड़ा दीपक, पीतल का दीया या फिर आटे से बना बड़ा चौमुखी दीपक ले सकते हैं। 2. **बाती तैयार करना:** कलावा (मौली) या शुद्ध सूती धागे से **33 अलग-अलग छोटी बत्तियां** तैयार करें। इन सभी 33 बत्तियों को एक साथ मिलाकर एक मोटी बाती बना लें। 3. **घी या तेल:** इस दीपक में शुद्ध गाय का घी या फिर तिल का तेल इस्तेमाल करना सबसे उत्तम माना जाता है। ### दीपदान करने का सही समय और स्थान * **शुभ दिन:** वैसे तो यह दीपक अधिक मास के किसी भी दिन जलाया जा सकता है, लेकिन **पूर्णिमा, अमावस्या, एकादशी, या पंचमी तिथि** के दिन इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। * **पवित्र स्थान:** इस दीपक को आप निम्नलिखित जगहों पर जला सकते हैं: * अपने घर के मंदिर में भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी के सामने। * **तुलसी जी के क्यारे के पास।** * किसी पवित्र नदी के तट पर (दीपदान के रूप में)। * शिव मंदिर या पीपल के पेड़ के नीचे। ### दीपदान करते समय नियम और संकल्प दीपक जलाते समय भगवान पुरुषोत्तम (विष्णु जी) का ध्यान करें। यदि संभव हो तो दीपदान करते समय अपनी मनोकामना बोलते हुए या भगवान विष्णु के मंत्र *(ॐ नमो भगवते वासुदेवाय)* का जाप करते हुए इसे प्रज्वलित करें। अधिक मास के अंत में इस तरह का दीपदान करने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और लक्ष्मी जी की विशेष कृपा बनी रहती है।

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