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नमस्ते गणनाथाय गणानां पतये नमः भक्तिप्रियाय देवेश भक्तेभ्य: सुखदायक। स्वानन्दवासिने तुभ्यं सिद्धिबुद्धिवराय च नाभिशेषाय देवाय ढुण्ढिराजाय ते नमः।। वरदाभयहस्ताय नमः परशुधारिणे नमस्ते सृणिहस्ताय नाभिशेषाय ते नमः। अनामयाय सर्वाय सर्वपूज्याय ते नमः सगुणाय नमस्तुभ्यं ब्राह्मणे निर्गुणाय च।। अर्थ:- भक्तों को सुख देने वाले देवेश्वर! आप भक्तिप्रिय हैं तथा गणों के अधिपति हैं; आपको नमस्कार है। आप ' स्वानन्दलोक' के वासी और सिद्धि - बुद्धि के प्राणबल्लभ हैं। आपकी नाभि में भूषणरूप से शेषनाग विराजते हैं; आप ढुण्ढिराज को नमस्कार है। आपके हाथों में वरद और अभय की मुद्राएं हैं। आप परशु धारण करते हैं। आपके हाथ में अंकुश शोभा पाता है और नाभि में नागराज; आपको नमस्कार है। आप रोगरहित, सर्वस्वरूप और सबके पूजनीय हैं; आपको नमस्कार है। आप ही सगुण और निर्गुण ब्रह्म हैं; आपको नमस्कार है।' 🌿🌹 शुभप्रभात 🌿🌹 🙏 🌿🌹🌿🌹🌿🌹

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