
Rama Devi Sahu
22 days ago
संध्या काल केवल दिन के ढलने का समय नहीं, बल्कि दिनभर की भागदौड़ के बाद आत्मा के अपने मूल स्वरूप—श्री राधा-कृष्ण—में लीन होने का पावन क्षण है। साँझ भई बनवारी आए, मुरली अधर बजाय। राधा संग जो छवि सोहै, मन का तिमिर मिटाय॥ कनक थार में दीप सजावैं, राधे रानी आरती गावैं। मंद-मंद मुसकावत कान्हा, मोहे सब जग सुर बिसरावैं॥ कंकन-किंकिण नूपुर बाजै, मोरमुकुट पीतांबर छाजै। जो झाँकी यह हिये बसावै, सोई भक्ति महारस पावै॥ जैसे संध्या का दीपक अंधेरे को दूर करता है, वैसे ही राधा-नाम का स्मरण मन के संशय और चिंता को मिटा देता है यह वह समय है जब कान्हा गायों को लेकर घर लौटते हैं और राधा जी प्रतीक्षा में दीप जलाती हैं। यह प्रतीक्षा ही भक्ति की पराकाष्ठा है। "आरती युगल किशोर की कीजै, तन-मन-धन सब अर्पण कीजै।" आज की शाम अपने घर के मंदिर में दीप जलाते समय बस एक पल ठहरकर युगल सरकार के चरणों में अपना पूरा दिन समर्पित कर दें। जय श्री राधे-कृष्णा! 🙏
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Aug 25, 2026
जय श्री कृष्णा राधे राधे जी 🙏 आप को शुभ रात्रि वंदन Ji 🙏 🌹

R k jangid phulera Jaipur
Aug 25, 2026
जय श्री कृष्णा शुभ संध्या वंदन जी 🙏
