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Rama Devi Sahu

83 days ago

क्या किसी पुरुष के गर्भ से संतान का जन्म संभव है? 😳 जानिए रघुवंश के राजा मांधाता के जन्म की यह अद्भुत और रहस्यमयी कथा! 👇✨ पुरुष के गर्भ से जन्मे चक्रवर्ती सम्राट: राजा मांधाता की अद्भुत कथा! 👑✨ रामायण के बालकाण्ड में गुरु वशिष्ठ द्वारा भगवान राम के महान 'रघुवंश' (इक्ष्वाकु वंश) का वर्णन किया गया है। इसी महान वंश की एक बेहद रोचक और रहस्यमयी कथा है— राजा मांधाता के जन्म की कहानी। आइए, इस अद्भुत कथा के पन्नों को पलटते हैं: 🌿 संतान प्राप्ति की कामना और वन प्रस्थान: ब्रह्मा जी से शुरू हुई इस वंशावली में इक्ष्वाकु वंश के राजा युवनाश्व का जन्म हुआ। सब कुछ होने के बाद भी राजा की कोई संतान नहीं थी। वंश को आगे बढ़ाने की चिंता में वे राज-पाट त्याग कर वन में तपस्या करने चले गए। वहां उनकी भेंट महर्षि भृगु के वंशज च्यवन ऋषि से हुई। 💧 च्यवन ऋषि का यज्ञ और अनजाने में हुई भूल: ऋषि ने राजा की संतान प्राप्ति के लिए इष्टि यज्ञ किया। यज्ञ के पश्चात उन्होंने एक कलश में अभिमंत्रित जल रखा, जिसे रानी को पीना था ताकि वह गर्भधारण कर सकें। यज्ञ की थकान के कारण रात में सभी ऋषि-मुनि गहरी नींद में सो गए। आधी रात को राजा युवनाश्व की नींद खुली और उन्हें भयंकर प्यास लगी। पानी न मिलने पर उन्होंने अनजाने में उसी कलश का अभिमंत्रित जल पी लिया! जब ऋषि को यह ज्ञात हुआ, तो उन्होंने घोषणा की कि अब संतान राजा के ही गर्भ से जन्म लेगी। 👶 एक चमत्कारिक जन्म और देवराज इंद्र का वरदान: समय आने पर देव-चिकित्सकों (अश्विनी कुमारों) ने राजा की कोख को चीरकर शिशु को बाहर निकाला। अब सबसे बड़ा प्रश्न था— शिशु अपनी भूख कैसे मिटाएगा? तभी वहां उपस्थित देवराज इंद्र ने शिशु के मुंह में अपनी अंगुली डाली (जिससे दूध की धारा बह निकली) और कहा— "मम धाता" (अर्थात: मैं इसकी मां हूं)। इसी कारण उस शिशु का नाम मांधाता पड़ा! 🚩 महान चक्रवर्ती सम्राट का शासन: इंद्र देव के दुग्ध-पान कराते ही शिशु तुरंत 13 बित्ता बड़ा हो गया। राजा मांधाता ने आगे चलकर अपने पराक्रम से इतिहास रचा: सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक के विशाल भू-भाग पर धर्मपूर्वक शासन किया। सौ अश्वमेध और सौ राजसूय यज्ञ संपन्न किए। दस योजन लंबे और एक योजन ऊंचे 'रोहित' नामक सोने के मत्स्य (मछली) बनवाकर ब्राह्मणों को दान में दिए। ✨ विष्णु दर्शन और स्वर्ग प्रस्थान: लंबे समय तक धर्म की स्थापना करने के बाद, भगवान विष्णु के दर्शन की लालसा में उन्होंने वन जाकर घोर तप किया। विष्णु जी के दर्शन प्राप्त करने के पश्चात् उन्होंने वन में ही अपने प्राण त्याग कर स्वर्ग की ओर प्रस्थान किया। ।। राजा मांधाता की जय हो ।। 🙏

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