
Rama Devi Sahu
99 days ago
जब माता सीता ने अग्नी में प्रवेश किया...??😱 लंका विजय के बाद जब माता सीता ने अग्नि में प्रवेश किया, तो यह उनकी पवित्रता और पतिव्रता धर्म को सिद्ध करने के लिए की गई एक दिव्य परीक्षा थी। यह घटना रामायण के युद्धकांड का हिस्सा है। श्री राम के कहने पर सीता जी ने लक्ष्मण से अग्नि प्रज्ज्वलित करने को कहा और फिर निडर होकर धधकती अग्नि में प्रवेश किया माता सीता की अग्निपरीक्षा के पीछे एक बड़ा रहस्य छिपा हुआ है। इस रहस्य के बारे में प्रभु राम भी जानते थे। हालांकि, जिस समय माता सीता ने अग्निपरीक्षा दी उस समय लक्ष्मी जी ने इसका विरोध किया था लेकिन, माता सीता की अग्नि परीक्षा भी प्रभु राम की एक लीला थी। विस्तार से जानें। माता सीता जब लंका से वापस आईं थी तब माता सीता ने अग्निपरीक्षा देनी पड़ थी। लेकिन, क्या आप जानते हैं माता सीता की इस अग्नि परीक्षा के पीछे एक बड़ा रहस्य है। रामायण कथा सिर्फ एक भाषा में नहीं बल्कि कई भाषाओं में है। अलग अलग रामायण में बताया गया है कि मां सीता एक नहीं बल्कि दो थी और माता सीता के इन दोनों स्वरुपों के बारे में भगवान राम जानते थे। आइए जानते हैं माता सीता की अग्नि परीक्षा का सच और माता सीता के दोनों स्वरुपों की कथा। क्या दो माता सीता थी ? रामायण की पौराणिक कथाओं के अनुसार, रामायण में एक नहीं बल्कि दो सीता थीं। एक माता सीता और दूसरी उनकी छाया। जब लक्ष्मण जी कंदमूल फल लेने के लिए वन में चले गए थे। तब भगवान राम ने माता सीते से कहा कि अब लीला करने वाला हूं और में राक्षसों का वध करुंगा। भगवान राम पहले की जानते थे कि रावण माता सीता का हरण करने वाला है। इसिलए उन्होंने अग्निदेव से माता सीता की सुरक्षा के लिए कहा। तब अग्निदेव के पास असली सीता गई और माता सीता की छाया वहीं रुक गई। माता सीता अग्निदेव की पूजा करती थी। इसलिए अग्निदेव उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकते थे। पूरे वनवास के दौरान माता सीता ही भगवान राम के साथ रही थी। जब रावण माता सीता को लेकर गया तो वह असली माता सीता को नहीं बल्कि माया सीता को लेकर गया था। क्यों की गई थी माता सीता का अग्नि परीक्षा जब भगवान राम ने रावण का वध किया उसके बाद जब अयोध्या वापस आना के समय हुआ तो माता सीता का अग्नि परीक्षा का बात कही गई। लक्ष्मजी ने इसका बहुत विरोध किया। लेकिन, भगवान राम सच जानते थे इसलिए माता सीता की अग्नि परीक्षा की गई। अग्निपरीक्षा एक दिव्य लीला थी। जैसे ही माता सीता अग्नि में प3वेश करती हैं वैसे ही माया सीता अग्नि में विलीन हो जाती है और अग्नि से जो बाहर प्रकट होती हैं वह असली माता सीता है। इसलिए ही माता सीता की अग्नि परीक्षा की गई थी ताकि माया सीता अग्नि में समा जाएं और आसली माता सीता वापस प्रभु राम के साथ अयोध्या लौंट जाएं।

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Rama Devi Sahu
May 23, 2026
🌹🙏 जय सिया राम जी 🌹 अपनों को समर्पित ~~\\~~~~ एक हृदय स्पर्शी प्रसंग--- माँ * 🌹❤️ *गुरुजी ने कहा कि मां के पल्लू पर निबन्ध लिखो..* *तो लिखने वाले छात्र ने क्या खूब लिखा.....* आदरणीय गुरुजी जी... माँ के पल्लू का सिद्धाँत माँ को गरिमामयी छवि प्रदान करने के लिए है, इसके साथ ही ... यह गरम बर्तन को चूल्हा से हटाते समय गरम बर्तन को पकड़ने के काम भी आता था, पल्लू की बात ही निराली थी, पल्लू पर तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है. पल्लू ... बच्चों का पसीना, आँसू पोंछने, गंदे कान, मुँह की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था. माँ इसको अपना हाथ पोंछने के लिए तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. खाना खाने के बाद पल्लू से मुँह साफ करने का अपना ही आनंद होता था. कभी आँख में दर्द होने पर ... माँ अपने पल्लू को गोल बनाकर, फूँक मारकर, गरम करके आँख में लगा देतीं थी, दर्द उसी समय गायब हो जाता था. माँ की गोद में सोने वाले बच्चों के लिए उसकी गोद गद्दा और उसका पल्लू चादर का काम करता था. जब भी कोई अंजान घर पर आता, तो बच्चा उसको माँ के पल्लू की ओट ले कर देखता था. जब भी बच्चे को किसी बात पर शर्म आती, वो पल्लू से अपना मुँह ढक कर छुप जाता था. जब बच्चों को बाहर जाना होता, तब 'माँ का पल्लू' एक मार्गदर्शक का काम करता था. जब तक बच्चे ने हाथ में पल्लू थाम रखा होता, तो सारी कायनात उसकी मुट्ठी में होती थी. जब मौसम ठंडा होता था ... माँ उसको अपने चारों ओर लपेट कर ठंड से बचाने की कोशिश करती. और, जब बारिश होती तो, माँ अपने पल्लू में ढाँक लेती. पल्लू --> एप्रन का काम भी करता था. माँ इसको हाथ तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. पल्लू का उपयोग पेड़ों से गिरने वाले मीठे जामुन और सुगंधित फूलों को लाने के लिए किया जाता था .🌹 पल्लू में धान, दान, प्रसाद भी संकलित किया जाता था. पल्लू घर में रखे सामान से धूल हटाने में भी बहुत सहायक होता था. कभी कोई वस्तु खो जाए, तो एकदम से पल्लू में गांठ लगाकर निश्चिंत हो जाना , कि जल्द मिल जाएगी. पल्लू में गाँठ लगा कर माँ एक चलता फिरता बैंक या तिजोरी रखती थी, और अगर सब कुछ ठीक रहा, तो कभी-कभी उस बैंक से कुछ पैसे भी मिल जाते थे. *मुझे नहीं लगता, कि विज्ञान पल्लू का विकल्प ढूँढ पाया है !* *मां का पल्लू कुछ और नहीं, बल्कि एक जादुई एहसास है !* स्नेह और संबंध रखने वाले अपनी माँ के इस प्यार और स्नेह को हमेशा महसूस करते हैं, जो कि आज की पीढ़ियों की समझ में आता है कि नहीं........ जय श्री सीताराम 🌹❤️🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏 ♥️ 🕉🌹♥️

Rama Devi Sahu
May 23, 2026
🌹🙏 जय सिया राम जी 🌹 अपनों को समर्पित ~~\\~~~~ एक हृदय स्पर्शी प्रसंग--- माँ * 🌹❤️ *गुरुजी ने कहा कि मां के पल्लू पर निबन्ध लिखो..* *तो लिखने वाले छात्र ने क्या खूब लिखा.....* आदरणीय गुरुजी जी... माँ के पल्लू का सिद्धाँत माँ को गरिमामयी छवि प्रदान करने के लिए है, इसके साथ ही ... यह गरम बर्तन को चूल्हा से हटाते समय गरम बर्तन को पकड़ने के काम भी आता था, पल्लू की बात ही निराली थी, पल्लू पर तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है. पल्लू ... बच्चों का पसीना, आँसू पोंछने, गंदे कान, मुँह की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था. माँ इसको अपना हाथ पोंछने के लिए तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. खाना खाने के बाद पल्लू से मुँह साफ करने का अपना ही आनंद होता था. कभी आँख में दर्द होने पर ... माँ अपने पल्लू को गोल बनाकर, फूँक मारकर, गरम करके आँख में लगा देतीं थी, दर्द उसी समय गायब हो जाता था. माँ की गोद में सोने वाले बच्चों के लिए उसकी गोद गद्दा और उसका पल्लू चादर का काम करता था. जब भी कोई अंजान घर पर आता, तो बच्चा उसको माँ के पल्लू की ओट ले कर देखता था. जब भी बच्चे को किसी बात पर शर्म आती, वो पल्लू से अपना मुँह ढक कर छुप जाता था. जब बच्चों को बाहर जाना होता, तब 'माँ का पल्लू' एक मार्गदर्शक का काम करता था. जब तक बच्चे ने हाथ में पल्लू थाम रखा होता, तो सारी कायनात उसकी मुट्ठी में होती थी. जब मौसम ठंडा होता था ... माँ उसको अपने चारों ओर लपेट कर ठंड से बचाने की कोशिश करती. और, जब बारिश होती तो, माँ अपने पल्लू में ढाँक लेती. पल्लू --> एप्रन का काम भी करता था. माँ इसको हाथ तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. पल्लू का उपयोग पेड़ों से गिरने वाले मीठे जामुन और सुगंधित फूलों को लाने के लिए किया जाता था .🌹 पल्लू में धान, दान, प्रसाद भी संकलित किया जाता था. पल्लू घर में रखे सामान से धूल हटाने में भी बहुत सहायक होता था. कभी कोई वस्तु खो जाए, तो एकदम से पल्लू में गांठ लगाकर निश्चिंत हो जाना , कि जल्द मिल जाएगी. पल्लू में गाँठ लगा कर माँ एक चलता फिरता बैंक या तिजोरी रखती थी, और अगर सब कुछ ठीक रहा, तो कभी-कभी उस बैंक से कुछ पैसे भी मिल जाते थे. *मुझे नहीं लगता, कि विज्ञान पल्लू का विकल्प ढूँढ पाया है !* *मां का पल्लू कुछ और नहीं, बल्कि एक जादुई एहसास है !* स्नेह और संबंध रखने वाले अपनी माँ के इस प्यार और स्नेह को हमेशा महसूस करते हैं, जो कि आज की पीढ़ियों की समझ में आता है कि नहीं........ जय श्री सीताराम 🌹❤️🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏 ♥️ 🕉🌹♥️

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May 23, 2026
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May 23, 2026
🌹🙏 जय सिया राम जी 🌹 अपनों को समर्पित ~~\\~~~~ एक हृदय स्पर्शी प्रसंग--- माँ * 🌹❤️ *गुरुजी ने कहा कि मां के पल्लू पर निबन्ध लिखो..* *तो लिखने वाले छात्र ने क्या खूब लिखा.....* आदरणीय गुरुजी जी... माँ के पल्लू का सिद्धाँत माँ को गरिमामयी छवि प्रदान करने के लिए है, इसके साथ ही ... यह गरम बर्तन को चूल्हा से हटाते समय गरम बर्तन को पकड़ने के काम भी आता था, पल्लू की बात ही निराली थी, पल्लू पर तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है. पल्लू ... बच्चों का पसीना, आँसू पोंछने, गंदे कान, मुँह की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था. माँ इसको अपना हाथ पोंछने के लिए तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. खाना खाने के बाद पल्लू से मुँह साफ करने का अपना ही आनंद होता था. कभी आँख में दर्द होने पर ... माँ अपने पल्लू को गोल बनाकर, फूँक मारकर, गरम करके आँख में लगा देतीं थी, दर्द उसी समय गायब हो जाता था. माँ की गोद में सोने वाले बच्चों के लिए उसकी गोद गद्दा और उसका पल्लू चादर का काम करता था. जब भी कोई अंजान घर पर आता, तो बच्चा उसको माँ के पल्लू की ओट ले कर देखता था. जब भी बच्चे को किसी बात पर शर्म आती, वो पल्लू से अपना मुँह ढक कर छुप जाता था. जब बच्चों को बाहर जाना होता, तब 'माँ का पल्लू' एक मार्गदर्शक का काम करता था. जब तक बच्चे ने हाथ में पल्लू थाम रखा होता, तो सारी कायनात उसकी मुट्ठी में होती थी. जब मौसम ठंडा होता था ... माँ उसको अपने चारों ओर लपेट कर ठंड से बचाने की कोशिश करती. और, जब बारिश होती तो, माँ अपने पल्लू में ढाँक लेती. पल्लू --> एप्रन का काम भी करता था. माँ इसको हाथ तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. पल्लू का उपयोग पेड़ों से गिरने वाले मीठे जामुन और सुगंधित फूलों को लाने के लिए किया जाता था .🌹 पल्लू में धान, दान, प्रसाद भी संकलित किया जाता था. पल्लू घर में रखे सामान से धूल हटाने में भी बहुत सहायक होता था. कभी कोई वस्तु खो जाए, तो एकदम से पल्लू में गांठ लगाकर निश्चिंत हो जाना , कि जल्द मिल जाएगी. पल्लू में गाँठ लगा कर माँ एक चलता फिरता बैंक या तिजोरी रखती थी, और अगर सब कुछ ठीक रहा, तो कभी-कभी उस बैंक से कुछ पैसे भी मिल जाते थे. *मुझे नहीं लगता, कि विज्ञान पल्लू का विकल्प ढूँढ पाया है !* *मां का पल्लू कुछ और नहीं, बल्कि एक जादुई एहसास है !* स्नेह और संबंध रखने वाले अपनी माँ के इस प्यार और स्नेह को हमेशा महसूस करते हैं, जो कि आज की पीढ़ियों की समझ में आता है कि नहीं........ जय श्री सीताराम 🌹❤️🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏 ♥️ 🕉🌹♥️

Rama Devi Sahu
May 23, 2026
🌹🙏 जय सिया राम जी 🌹 अपनों को समर्पित ~~\\~~~~ एक हृदय स्पर्शी प्रसंग--- माँ * 🌹❤️ *गुरुजी ने कहा कि मां के पल्लू पर निबन्ध लिखो..* *तो लिखने वाले छात्र ने क्या खूब लिखा.....* आदरणीय गुरुजी जी... माँ के पल्लू का सिद्धाँत माँ को गरिमामयी छवि प्रदान करने के लिए है, इसके साथ ही ... यह गरम बर्तन को चूल्हा से हटाते समय गरम बर्तन को पकड़ने के काम भी आता था, पल्लू की बात ही निराली थी, पल्लू पर तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है. पल्लू ... बच्चों का पसीना, आँसू पोंछने, गंदे कान, मुँह की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था. माँ इसको अपना हाथ पोंछने के लिए तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. खाना खाने के बाद पल्लू से मुँह साफ करने का अपना ही आनंद होता था. कभी आँख में दर्द होने पर ... माँ अपने पल्लू को गोल बनाकर, फूँक मारकर, गरम करके आँख में लगा देतीं थी, दर्द उसी समय गायब हो जाता था. माँ की गोद में सोने वाले बच्चों के लिए उसकी गोद गद्दा और उसका पल्लू चादर का काम करता था. जब भी कोई अंजान घर पर आता, तो बच्चा उसको माँ के पल्लू की ओट ले कर देखता था. जब भी बच्चे को किसी बात पर शर्म आती, वो पल्लू से अपना मुँह ढक कर छुप जाता था. जब बच्चों को बाहर जाना होता, तब 'माँ का पल्लू' एक मार्गदर्शक का काम करता था. जब तक बच्चे ने हाथ में पल्लू थाम रखा होता, तो सारी कायनात उसकी मुट्ठी में होती थी. जब मौसम ठंडा होता था ... माँ उसको अपने चारों ओर लपेट कर ठंड से बचाने की कोशिश करती. और, जब बारिश होती तो, माँ अपने पल्लू में ढाँक लेती. पल्लू --> एप्रन का काम भी करता था. माँ इसको हाथ तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. पल्लू का उपयोग पेड़ों से गिरने वाले मीठे जामुन और सुगंधित फूलों को लाने के लिए किया जाता था .🌹 पल्लू में धान, दान, प्रसाद भी संकलित किया जाता था. पल्लू घर में रखे सामान से धूल हटाने में भी बहुत सहायक होता था. कभी कोई वस्तु खो जाए, तो एकदम से पल्लू में गांठ लगाकर निश्चिंत हो जाना , कि जल्द मिल जाएगी. पल्लू में गाँठ लगा कर माँ एक चलता फिरता बैंक या तिजोरी रखती थी, और अगर सब कुछ ठीक रहा, तो कभी-कभी उस बैंक से कुछ पैसे भी मिल जाते थे. *मुझे नहीं लगता, कि विज्ञान पल्लू का विकल्प ढूँढ पाया है !* *मां का पल्लू कुछ और नहीं, बल्कि एक जादुई एहसास है !* स्नेह और संबंध रखने वाले अपनी माँ के इस प्यार और स्नेह को हमेशा महसूस करते हैं, जो कि आज की पीढ़ियों की समझ में आता है कि नहीं........ जय श्री सीताराम 🌹❤️🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏 ♥️ 🕉🌹♥️

Rama Devi Sahu
May 23, 2026
🌹🙏 जय सिया राम जी 🌹 अपनों को समर्पित ~~\\~~~~ एक हृदय स्पर्शी प्रसंग--- माँ * 🌹❤️ *गुरुजी ने कहा कि मां के पल्लू पर निबन्ध लिखो..* *तो लिखने वाले छात्र ने क्या खूब लिखा.....* आदरणीय गुरुजी जी... माँ के पल्लू का सिद्धाँत माँ को गरिमामयी छवि प्रदान करने के लिए है, इसके साथ ही ... यह गरम बर्तन को चूल्हा से हटाते समय गरम बर्तन को पकड़ने के काम भी आता था, पल्लू की बात ही निराली थी, पल्लू पर तो बहुत कुछ लिखा जा सकता है. पल्लू ... बच्चों का पसीना, आँसू पोंछने, गंदे कान, मुँह की सफाई के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था. माँ इसको अपना हाथ पोंछने के लिए तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. खाना खाने के बाद पल्लू से मुँह साफ करने का अपना ही आनंद होता था. कभी आँख में दर्द होने पर ... माँ अपने पल्लू को गोल बनाकर, फूँक मारकर, गरम करके आँख में लगा देतीं थी, दर्द उसी समय गायब हो जाता था. माँ की गोद में सोने वाले बच्चों के लिए उसकी गोद गद्दा और उसका पल्लू चादर का काम करता था. जब भी कोई अंजान घर पर आता, तो बच्चा उसको माँ के पल्लू की ओट ले कर देखता था. जब भी बच्चे को किसी बात पर शर्म आती, वो पल्लू से अपना मुँह ढक कर छुप जाता था. जब बच्चों को बाहर जाना होता, तब 'माँ का पल्लू' एक मार्गदर्शक का काम करता था. जब तक बच्चे ने हाथ में पल्लू थाम रखा होता, तो सारी कायनात उसकी मुट्ठी में होती थी. जब मौसम ठंडा होता था ... माँ उसको अपने चारों ओर लपेट कर ठंड से बचाने की कोशिश करती. और, जब बारिश होती तो, माँ अपने पल्लू में ढाँक लेती. पल्लू --> एप्रन का काम भी करता था. माँ इसको हाथ तौलिया के रूप में भी इस्तेमाल कर लेती थी. पल्लू का उपयोग पेड़ों से गिरने वाले मीठे जामुन और सुगंधित फूलों को लाने के लिए किया जाता था .🌹 पल्लू में धान, दान, प्रसाद भी संकलित किया जाता था. पल्लू घर में रखे सामान से धूल हटाने में भी बहुत सहायक होता था. कभी कोई वस्तु खो जाए, तो एकदम से पल्लू में गांठ लगाकर निश्चिंत हो जाना , कि जल्द मिल जाएगी. पल्लू में गाँठ लगा कर माँ एक चलता फिरता बैंक या तिजोरी रखती थी, और अगर सब कुछ ठीक रहा, तो कभी-कभी उस बैंक से कुछ पैसे भी मिल जाते थे. *मुझे नहीं लगता, कि विज्ञान पल्लू का विकल्प ढूँढ पाया है !* *मां का पल्लू कुछ और नहीं, बल्कि एक जादुई एहसास है !* स्नेह और संबंध रखने वाले अपनी माँ के इस प्यार और स्नेह को हमेशा महसूस करते हैं, जो कि आज की पीढ़ियों की समझ में आता है कि नहीं........ जय श्री सीताराम 🌹❤️🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏 ♥️ 🕉🌹♥️

R k jangid phulera Jaipur
May 23, 2026
जय हो सीता मैया की🌹🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
May 23, 2026
नमस्ते 🙏जय हनुमान 🙏 जय शनि देव 🙏 राधे राधे जी 🙏✨ आप सभी के लिए आज का शुभ आशीर्वाद और सुविचार: ### आज का आशीर्वाद **"श्री हनुमान जी की कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हों और शनि देव की दृष्टि से आपके कार्यों में स्थिरता और सफलता आए। आपका आज का दिन सुखद, मंगलमय और शांतिपूर्ण व्यतीत हो।"** ### आज का सुविचार > **"धैर्य और ईमानदारी ही वह मार्ग है, जो कठिन समय में भी मनुष्य को अडिग रखती है। याद रखें, जो व्यक्ति अपने शब्दों का मान रखता है, वही समाज और परिवार में सम्मान का पात्र बनता है।"** > ईश्वर आप पर सदैव अपनी कृपा बनाए रखें। आप दिनभर ऊर्जावान और सकारात्मक रहें!

सविता
May 23, 2026
Radhe radhe 🙏🌹

