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Rama Devi Sahu

176 days ago

#कबीरदास जी के इस दोहे का भावार्थ यह है कि केवल मुख से "राम-राम" जपने या दिखावा करने से ईश्वर नहीं मिलते, क्योंकि ठग, चोर और अपराधी भी अक्सर दिखावे के लिए राम नाम लेते हैं। सच्चा राम हृदय में बसने वाला, निराकार और निर्गुण आत्मा है, जिससे मीरा, प्रहलाद जैसे भक्त तर गए, न कि केवल होठों से लिया गया नाम। विस्तृत भावार्थ: राम राम सब कोई कहे, ठग ठाकुर और चोर: कबीरदास जी कहते हैं कि राम का नाम तो हर कोई लेता है - अपराधी, ढोंगी, और चोर भी अपनी चालाकी छिपाने या लोगों को धोखा देने के लिए राम-राम का ढोंग करते हैं। यह बाहरी दिखावा है। जिस राम से मीरा तरे, वह राम कोई और: वह राम, जिससे मीराबाई, प्रहलाद और ध्रुव जैसे सच्चे भक्त इस सांसारिक कष्टों के सागर से पार हो गए, वह कोई और ही है। सार: वह राम आपके अंदर का सच्चा विश्वास, निर्गुण परमात्मा या आत्मा का स्वरूप है, जिसे पाने के लिए पवित्र हृदय और निस्वार्थ भक्ति की आवश्यकता है, न कि केवल बाहरी दिखावे की।#

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Comments (3)

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Mar 7, 2026

hsi na mahagyani tumare jaganathji🙏 dhanyawad aapko swasth Kush raho

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Mar 7, 2026

Paras Chune ki Lohe bhi Sona ho jata hai...Aap bhi Santha ya Mahapurush kahne ke liye koi mere paas savda nhi hai... Aap tho ek Gyani hai...! Ram Ram 🙏

Srikumar  महाराज🇮🇳☸️

Srikumar महाराज🇮🇳☸️

Mar 7, 2026

ଦାର୍ଶନିକଙ୍କ ପଥର ସ୍ପର୍ଶ କଲେ ଲୁହା ସୁନା ହୋଇଯାଏ। କବିର, ତାହା ମଧ୍ୟ ସୁନା ହୋଇଯାଏ। (ଅର୍ଥ: ଭଲ ସନ୍ଥମାନଙ୍କ ସହିତ ମିଶି ଜଣେ ସାଧାରଣ ବ୍ୟକ୍ତି ମଧ୍ୟ ଜ୍ଞାନୀ ହୋଇଯାଏ, ଯେପରି ଦାର୍ଶନିକଙ୍କ ପଥର ସ୍ପର୍ଶ କଲେ ଲୁହା ସୁନା ହୋଇଯାଏ।)