
Rama Devi Sahu
11 days ago
🐟 भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार और ‘भूतभृत्’ नाम की कथा 🙏 सृष्टि के एक कल्प के अंत में जब महाप्रलय का समय आया, तब चारों ओर जल ही जल फैलने लगा। समुद्र की विशाल लहरें पृथ्वी को अपने भीतर समेटने लगीं और भयंकर तूफान से पूरा संसार भयभीत हो उठा। उस समय वैवस्वत मनु को आने वाली सृष्टि के लिए जीवन के बीजों को सुरक्षित रखने का दायित्व मिला। उनके साथ सप्तऋषि भी थे। वनस्पतियों के बीज, विभिन्न जीव-जंतुओं की प्रजातियाँ और आवश्यक ज्ञान सुरक्षित रखने के लिए एक विशाल नाव तैयार की गई। लेकिन प्रलय का जल बढ़ता ही गया। आकाश में काले बादल छा गए और चारों ओर उठती विकराल लहरों के बीच वह विशाल नाव भी बुरी तरह डगमगाने लगी। मनु और सप्तऋषियों को चिंता होने लगी कि यदि नाव डूब गई, तो आने वाली सृष्टि के लिए जीवन का आधार ही समाप्त हो जाएगा। तभी उस अथाह प्रलय-सागर के बीच एक अद्भुत दिव्य प्रकाश दिखाई दिया। जल को चीरते हुए भगवान विष्णु मत्स्य रूप में प्रकट हुए। उनका विशाल शरीर दिव्य तेज से चमक रहा था और उनके मस्तक पर एक अद्भुत सींग था। भगवान ने मनु को आश्वस्त किया और कहा कि वे नाव तथा उसमें सुरक्षित समस्त जीवन की रक्षा करेंगे। तब वासुकी नाग को रस्सी के रूप में प्रयोग करके नाव को भगवान मत्स्य के सींग से बाँधा गया। प्रलय का समुद्र कितना भी विकराल क्यों न हुआ, भगवान मत्स्य उस नाव को अपने साथ सुरक्षित दिशा में ले जाते रहे। नाव में बैठे मनु, सप्तऋषि और सुरक्षित किए गए जीव-जगत के बीज भगवान की दिव्य शक्ति के संरक्षण में थे। प्रलय के बाद जब जल घटने लगा, तब इसी सुरक्षित जीवन-सामग्री के आधार पर नई सृष्टि के आरंभ की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस प्रकार भगवान विष्णु ने केवल एक नाव की रक्षा नहीं की, बल्कि आने वाली सृष्टि के जीवन का आधार सुरक्षित रखा। इसी भाव से भगवान विष्णु का एक पवित्र नाम है— ॥ भूतभृत् ॥ ‘भूत’ अर्थात समस्त प्राणी और जीव-जगत। ‘भृत्’ अर्थात धारण करने वाला, पालन करने वाला और संरक्षण करने वाला। अर्थात— > जो समस्त प्राणियों को धारण करते हैं, उनका पालन करते हैं और संकट के समय उनके अस्तित्व की रक्षा करते हैं, वे भगवान विष्णु ‘भूतभृत्’ कहलाते हैं। जब संसार का सहारा समाप्त होता दिखाई दे, तब भी श्रीहरि अपने भक्तों और समस्त सृष्टि का भार संभाल लेते हैं। जय श्रीहरि 🙏🪷
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